विवादों के कारण कई पद रह गए हैं खाली
जिनका रिजल्ट बाद में आया, उनकी नियुक्ति की संस्तुति बाद में भेजी गई। परीक्षा के बाद आयोग ने वर्ष 2019 में पहले चरण के तहत सात विषयों का परिणाम जारी किया। दूसरे चरण में छह विषयों का परिणाम दिया और तीसरे चरण में सबसे प्रमुख विषय हिंदी एवं सामाजिक विज्ञान का परिणाम जारी किया, जिनमें पदों और अभ्यर्थियों की संख्या सबसे अधिक थी।
अर्हता एवं अन्य विवादों के कारण हिंदी, सामाजिक विज्ञान, कला समेत कई विषयों में बड़ी संख्या में पद खाली रह गए, जिन्हें भरने के लिए अब अवशेष श्रेष्ठता सूची से अभ्यर्थियों का चयन किया जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पांच साल बाद भी भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। परिणाम की विसंगति के कारण एक साथ परीक्षा देने के बावजूद किसी को पहले तो किसी को बाद में नियुक्ति मिली।
यह सिलसिला अब तक जारी है। अपने ही साथियों से कई अभ्यर्थी एक साल तो कई दो से तीन साल तक जूनियर हो गए हैं। इसका असर उनके वेतन, प्रोन्नति, भत्तों और पेंशन पर भी पड़ेगा। अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि जिन अभ्यर्थियों को सबसे पहले नियुक्ति मिली, उनकी नियुक्ति की तिथि से बाकी सभी चयनित अभ्यर्थियों को भी वेतन वृद्धि, प्रोन्नति आदि का लाभ दिया जाए।