केंद्र सरकार रसोई गैस ग्राहकों को डीबीटीएल योजना से जोड़ने के लिए कई सुविधाएं दी हैं लेकिन ग्राहकों के लिए यह बेकार साबित हो रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय गैस एजेंसियों पर पोस्टर और बैनर लगाकर दावा कर रहा है कि मायएलपीजी.इन के जरिए ग्राहक सीधे ऑनलाइन आधार नंबर गैस कंपनियों से रजिस्टर्ड कर सकते हैं लेकिन ग्राहकों के लिए यह वेबसाइट किसी काम की नहीं है। घंटे-घंटेभर के प्रयास पर खुलने वाली इस वेबसाइट से जुड़े लिंक से भी आधार नंबर रजिस्टर्ड नहीं हो रहे हैं। ग्राहकों के लिए रजिस्टर्ड डाक से भरे हुए फार्म भेजना एक अच्छा विकल्प हो सकता है लेकिन यह डाक डिस्ट्रीब्यूटर्स के कार्यालय नहीं, तेल कंपनियों के क्षेत्रीय कार्यालयों पर ही भेजी जा सकेगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय रसोई गैस की सब्सिडी को आधार नंबर से जोड़ने और सब्सिडी की रकम को बैंक के जरिए भुगतान करने की योजना पर पूरी तेजी से आगे बढ़ी है। रसोई गैस के जिन उपभोक्ताओं के पास आधार है और जिनके पास नहीं है, वह भी बैंक से सब्सिडी हासिल कर सकते हैं लेकिन इसके लिए कागजी लिखापढ़ी पूरी करनी होगी। इस लिखापढ़ी के लिए ग्राहकों को बैंक और डिस्ट्रीब्यूटर्स के कार्यालयों में दौड़ना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने दावा किया है कि ग्राहक ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन भी करा सकते हैं। इसमें जिन उपभोक्ताओं के पास आधार नंबर है उन्हें मायएलपीजी.इन वेब पेज पर जाकर तेल कंपनी का चयन करना है। जिनके पास आधार नंबर नहीं है वह भी इसके जरिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं लेकिन सच्चाई इससे इतर है।
आईओसी के ग्राहक मनीष कुमार सिंह की शिकायत है कि स्टेप-2 में 17 डिजिट के एलपीजी आईडी से आधार जोड़ने के लिए चार विकल्प सुझाए गए हैं लेकिन आईवीआरएस और एसएमएस का विकल्प काम नहीं करता। इससे सिर्फ गैस बुकिंग हो रही है। आरएएसएफ.यूआईएडीएआई.जीओवी.इन पर भी एलपीजी आईडी से आधार रजिस्ट्रेशन रजिस्टर्ड होने तीन से चार घंटे लग रहे हैं। इस वेबसाइट का नेटवर्क अक्सर खराब बताता है। कॉल सेंटर का नंबर 1800-2333-555 भी काम नहीं करता।