प्रयागराज की धरती पर इस समय दुनिया का सबसे बड़ा मेला चल रहा है। लाखों की संख्या में लोग रोज कुंभ मेले में पहुंच रहे हैं। किसी का उद्देश्य संगम में डुबकी लगाकर पुण्य की प्राप्ति करना है तो किसी का उद्देश्य यहां की भव्यता और दिव्यता को आंखों में बसा लेना है। विशाल मेला लगा है तो स्वाभाविक तौर पर पर ऐसी बहुत सारी चीजें मिलेगी जो कौतुहल का विषय होंगी।
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कंदमूल फल
प्रयागराज में तो कई ऐसी चीजें मिल रही हैं जो आपके चेहरे पर हंसी ला देंगी। जैसे, काले घोड़े की नाल की अंगूठी व हिमालय की गोदी से लाया शिलाजीत। इसी तरह मेले में ही बिक रहा कंदमूल फल है जिसे देखकर श्रद्धालु रुक जाते हैं। कंदमूल फल को बेचने वाले इसे रामफल भी बताते हैं, इसे बेचने में भगवान राम का सहारा लिया जा रहा है।
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कंदमूल फल
दुकानदार बताते हैं कि भगवान राम जब वनवास में जीवन व्यतीत कर रहे थे तो यही खाते थे। उनकी इन बातों में कितनी सच्चाई है ये तो प्रभु श्रीराम ही जाने, पर मेले में इस फल को बेचने में उन्हें ब्राण्ड एंबेसडर की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है।
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कंदमूल फल
दरअसल, कंदमूल हर उस खाने योग्य पदार्थ को कहा जाता है जो जड़ के रूप में होते हैं। प्राचीन समय में मानव इसे खाकर अपना पेट भरते थे। जंगलों में इन चीजों की बहुलता होती है इसलिए आसानी से मिल जाते हैं। आज भी चित्रकूट और नासिक में ये खूब पाये जाते हैं। मेलें में इसे बेच रहे ज्यादातर दुकानदार वहीं के हैं।
बाहर से नारंगी और अन्दर से हल्के भूरे रंग का दिखने वाले इस कंदमूल का स्वाद उस नाशपाती से मिलता है जो एकदम फीकी हो, मतलब कंदमूल का कोई विशेष स्वाद नही होता। मूली, शलजम, गाजर को भी अगर आप कंदमूल कहें तो गलत नही होगा। फिलहाल हर बार की तरह इस बार भी मेले में कंदमूल का रूप मेले में खास आकर्षित कर रहा है।