पहली बार लोकसभा चुनाव में हाथ आजमा रहे कांग्रेस प्रत्याशी पंकज चंदेल का जोर पटेल बिरादरी के वोटरों पर है। कांग्रेस के परंपरागत वोट उन्हें हासिल हों, इसका प्रयास वह कर रहे हैं। इस बीच उनके बाहरी होने की चर्चा पटेल मतों के ध्रुवीकरण में बाधा बन रही है। पिछड़े वर्गों के मतों में भी सेंधमारी और पुराने कांग्रेसियों का साथ उन्हें मिलता है तो वह चुनाव में कुछ नया कर पाएंगे। अन्यथा जातिगत गणित की उलझन उन पर भारी पड़ेगी।
पंधारी के सामने बड़ी चुनौती
गठबंधन प्रत्याशी पंधारी यादव के सामने बड़ी चुनौती उपचुनाव में हासिल सीट बचाने की है। टिकट वितरण में बढ़ी नाराजगी से भितरघात का खतरा सामने दिख रहा है। उनका सहारा बने हैं सपा के परंपरागत वोट और बसपा का जुड़ाव, लेकिन दोनों में ही बिखराव मुश्किल पैदा कर रहा है। इसकी काट मुस्लिम मतदाता बन सकते हैं, बशर्ते पूरी बिरादरी के वोट उन्हें इकतरफा मिले। राजनीतिक कौशल से वह रुठों को मनाने और शहरी क्षेत्र में सियासी गणित दुरुस्त करने में जुटे हैं। इसके बावजूद शिवपाल यादव के खास लोगों की मजबूत पकड़ उनकी कमजोरी का कारण बन सकती है।