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धुरंधर तय करेंगे दिशा: जीत की काट खोज रहे विपक्षी दल, भाजपा प्रत्याशी प्रचार में आगे

Fri, 10 May 2019 05:24 AM IST
देव कश्यप मुनेंद्र बाजपेयी, अमर उजाला, प्रयागराज
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डॉ. रीता बहुगुणा जोशी (भाजपा), योगेश शुक्ला (कांग्रेस), और राजेंद्र सिंह (गठबंधन) - फोटो : अमर उजाला
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पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, वीपी सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा, महानायक अमिताभ बच्चन, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, कुंवर रेवती रमण सिंह जैसे दिग्गज नेताओं का चुनावी रण बन चुकी इलाहाबाद संसदीय सीट पर इस बार फिर सबकी निगाहें हैं। टिकट पाने में बाजी मार चुकीं भाजपा प्रत्याशी डॉ. रीता बहुगुणा जोशी प्रचार में भी आगे दिख रही हैं। सपा हो या कांग्रेस, दोनों दलों के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को अपने पाले में करना उनकी ताकत बनी है। भाजपा के सामने सपा-बसपा गठबंधन से प्रत्याशी राजेंद्र सिंह दस दिन पहले टिकट मिलने का नुकसान भांप चुके हैं। उन्हें सपा के दिग्गज नेता रेवती रमण सिंह के चुनावी कौशल का फायदा मिला तो परिणाम कुछ चौंकाने वाला होगा। इन सबके बीच कांग्रेस ने पुराने नेताओं को छोड़ कर भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार रहे योगेश शुक्ला को प्रत्याशी बनाकर चौंका दिया।

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कांग्रेस ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। एक तो भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। वहीं, सवर्ण मतदाताओं में घुसपैठ की राह आसान कर ली। मिली-जुली आबादी वाले इस क्षेत्र में वैश्य, ब्राह्मण और कायस्थ मतों के साथ ग्रामीणों का समर्थन हासिल करने वाला सांसद होगा। इसके लिए सपा से राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह, भाजपा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया, मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी और दूसरी बार महापौर चुनी गईं अभिलाषा गुप्ता नंदी का साथ या समर्थन जरूरी होगा। ऐसे में वोटों की जातीय गणित साधने में लगभग सभी दल जुटे हैं लेकिन भितरघात के सभी दल शिकार हैं। इस सियासी गणित के बीच सबके अपने-अपने दावे हैं, लेकिन 12 मई को यह मतदाता ही तय करेंगे कि सांसद कौन होगा।

बहुगुणा को सबके साथ का भरोसा
भाजपा प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी अपने पिता हेमवती नंदन बहुगुणा की कर्मभूमि से दूसरी बार लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं। उन्हें भाजपा के परंपरागत वोटों के साथ सबके साथ का भरोसा है। पार्टी में टिकट चाहने वालों की नाराजगी के नुकसान को वह कैसे लाभ में बदलेंगी, यह उनके सियासी चातुर्य पर निर्भर करेगा। हालांकि कई कार्यक्रमों में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महापौर अभिलाषा गुप्ता भी उनके साथ मजबूती से खड़े दिखे। विपक्ष में सेंधमारी उनकी अतिरिक्त ताकत है। पीएम मोदी के राष्ट्रवाद और सीएम योगी के विकास, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का नारा उनकी लोकप्रियता बढ़ा रहा है। मेजा, बारा, करछना समेत अन्य क्षेत्रों में विधायक नीलम करवरिया का डेरा डालना विरोधियों के लिए खतरा है। ऐसे में डॉ. रीता इर्द गिर्द रहने वालों के कारण लोगों से बढ़ रही नाराजगी दूर कर लेती हैं तो परिणाम उत्साहजनक हो सकते हैं।
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परंपरागत वोट और रेवती को साध रहे राजेंद्र

सपा के राजेंद्र सिंह को रेवती रमण सिंह का आशीर्वाद मिल चुका है। वह सपा-बसपा के परंपरागत वोटों को साधने में लगे हैं। कार्यकर्ताओं में स्वीकार्यता बढ़ाना व बसपा के काडर वोटों का ध्रुवीकरण उनके लिए बड़ी चुनौती है। ग्रामीण इलाकों में गठबंधन की पैठ का फायदा उन्हें मिलता दिख रहा है। ऐसे में रणनीति ही उन्हें चुनावी वैतरणी पार करा सकती है। उन्हें जातीय समीकरणों को पक्ष में करने के साथ रूठे नेताओं को मनाने की जुगत करनी पडे़गी, तभी चुनाव में उनकी धमक का निर्णय सामने आएगा।

भाजपा में भी सेंधमारी करेंगे कांग्रेस के योगेश
कांग्रेस ने योगेश को पार्टी का सिंबल देकर भाजपा के साथ सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशियों की राह में कांटे बो दिए हैं। योगेश भाजपा के वोटों में सेंधमारी करेंगे। भाजपा में ठीकठाक जनाधार और सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं से उनका संपर्क उन्हें राजनीति में आगे कर रहा है, लेकिन नई पार्टी में पुराने नेताओं की नाराजगी भारी पड़ रही है। ऐन मौके पर भाजपा को टाटा कर कांग्रेस का दामन थामने वाले योगेश की ग्रामीण इलाकों में साख ठीकठाक है। शहरी क्षेत्र में संपर्क जनाधार में बदला तो उनका निर्णय सही साबित हो सकता है। वोटों की गणित साफ है कि शहर के साथ गांव साधने वाला प्रत्याशी ही चुनावी राह में सरपट दौड़ेगा।
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