अभियोजन के अनुसार वादी गिरधर लाल त्रिपाठी निवासी अल्लापुर ने जार्जटाउन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि एक सितंबर 1986 को आलोक त्रिपाठी अपनी पत्नी मीरा की विदाई कराने गया था।
इलाहाबाद जिला न्यायालय ने 1986 में जॉर्जटाउन थानाक्षेत्र में पत्नी के विदाई के विवाद में अवकाश प्राप्त सेशन जज एमपी त्रिपाठी के बेटे आलोक शंकर त्रिपाठी की हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर अश्वनी कुमार और रमेश चंद्र उर्फ लाल जी को आजीवन कारावास एवं 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश चंद्रपाल द्वितीय ने सुनाया है।
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अभियोजन के अनुसार वादी गिरधर लाल त्रिपाठी निवासी अल्लापुर ने जार्जटाउन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि एक सितंबर 1986 को आलोक त्रिपाठी अपनी पत्नी मीरा की विदाई कराने गया था। विवाद होने पर अमृतलाल त्रिपाठी, अश्वनी कुमार, रमेश चंद्र ने उसे गोली मार दी। उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। सत्र न्यायालय को मुकदमा सौंपे जाने से पूर्व आरोपी अमृत लाल त्रिपाठी की मौत हो गई। अभियोजन ने 10 गवाहों के जरिए आरोप साबित कर दिया।