कौशांबी की अदालत ने 2018 में 14 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी को आजीवन कारावास और 35,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सह-आरोपी गुड्डन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
कौशांबी स्थानीय अदालत ने 2018 में 14 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म और हत्या के मामले में शनिवार को सीता शरण को आजीवन कारावास और 35,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) अशोक कुमार श्रीवास्तव ने यह फैसला सुनाया। सह-आरोपी गुड्डन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
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अतिरिक्त जिला सरकारी वकील (आपराधिक) शशांक खरे ने बताया कि 30 अप्रैल 2018 को कोखराज थाने में शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें 19 वर्षीय सीता शरण पर लड़की को बुलाने और उसकी अनुपस्थिति में घर न लौटने का आरोप था। बाद में उसी दिन उसका शव गांव के बाहर सरकारी ट्यूबवेल की नहर में मिला।
जांच में पाया गया कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर हत्या की गई थी। शिकायत के आधार पर सीता शरण और गुड्डन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। खरे ने कहा, 'दोषी सीता शरण को कठोर आजीवन कारावास और 35,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माने की पूरी राशि मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।'