रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्कूलों में छात्रों की कमी है। इनकी संख्या दिखाने को फर्जी ढंग से निजी स्कूलों के छात्रों का पंजीकरण किया गया है। कई स्कूलों में 50 से भी कम छात्र हैं। स्कूल में खाना बनाने की व्यवस्था से शिक्षा का स्तर गिर गया है। अध्यापकों में पढ़ाने की रुचि नहीं है। सुझाव दिया कि छात्रों की भोजन से नहीं, परिवार की आर्थिक मदद की जाए।
वहीं, रिसर्च एसोसिएट ने कहा कि अध्यापकों की बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज हो। सीसीटीवी कैमरे से ब्लॉक स्तर पर निगरानी हो। न्यायालय ने इन सुझावों-रिपोर्ट की प्रति मेरठ के डीएम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व महाधिवक्ता कार्यालय को अनुपालन के लिए भेजने को कहा है। कहा कि कोई वैधानिक अड़चन न हो तो न्यायमित्र की रिपोर्ट व दो रिसर्च एसोसिएट के सुझावों को अमल में लाएं।