छतनाग झूंसी के हरिश्चंद्र शोध संस्थान परिसर में तेंदुए की खोजबीन करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
मैंने अपनी आंखों से देखा तेंदुआ
सुरक्षाकर्मी हरिमोहन शुक्ला ने बताया कि उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। शनिवार शाम को तकरीबन साढ़े पांच बजे 12 फीट ऊंचे टावर के ऊपर चढ़कर ड्यूटी कर रहा था। तभी उसकी नजर टावर के ठीक नीचे खड़े तेंदुए पर पड़ी। कुछ देर के लिए तो उसे कुछ सूझा। कुछ देर बाद उसने अन्य सुरक्षाकर्मियों और कंट्रोल रूम को जानकारी दी।
हरिश्चंद्र शोध संस्थान में इसी रास्ते से घुसा था तेंदुआ।
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दो महीने से वन विभाग को नचा रहा तेंदुआ
पिछले दो महीने से तेंदुआ वन विभाग को नचा रहा है लेकिन उसे अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। जिसे लेकर लोगों में नाराजगी है। छतनाग निवासी अधिवक्ता तेज प्रकाश मिश्रा का कहना है कि वन विभाग सक्रियता दिखाता तो तेंदुए को अब तक पकड़ लिया गया होता लेकिन वनकर्मियों की उदासीनता के कारण लोग दहशत में हैं। तेंदुआ अब झूंसी की घनी आबादी में दाखिल हो गया है।
हरिश्चंद्र शोध संस्थान के ठीक सामने स्थित एक्युप्रेशर संस्थान के डॉ. अभय त्रिपाठी का कहना है कि जब से तेंदुए के होने की जानकारी मिली है। तभी से संस्थान के चिकित्सक एवं छात्र सहमे हुए हैं। यहीं के सुनील मिश्रा का कहना है कि जब से तेंदुए के बारे में सुना है। तब से जान का खतरा बना हुआ है।
सदाफल देव आश्रम के बबलू सिंह का कहना है कि शनिवार की रात उन्होंने और आश्रम के अन्य लोगों ने तेंदुए के गुर्राने की आवाज सुनी थी।जब से तेंदुए के बारे में सुना है वह लाठी-डंडा लेकर हमेशा सचेत रहते हैं। उन्होंने तेंदुए के न पकड़े जाने को लेकर वन कर्मियों पर सवाल उठाए हैं।
दोपहर बाद परिसर के भीतर वॉच टावर नंबर एक और नौ के पास तेंदुए को दबोचने के लिए पिंजड़ा लगाया गया है। भीतर मांस का टुकड़ा रखा जाएगा। रातभर में उसे दबोचे जाने की उम्मीद है। - लक्ष्मीकांत दुबे, वन क्षेत्राधिकारी