बाइस साल पहले बरांव, करछना के एक प्राचीन मंदिर से चोरी हुई अष्टधातु की मूर्तियों को न्यायालय के आदेश पर शुक्रवार को मंदिर को वापस दे दी गईं। प्राचीन मंदिर में राज्य सभा सांसद की भी आस्था जुड़ी है। मूर्तियों के वापस आने से क्षेत्र में खुशहाली फैल गई है।
करछना के बरांव गांव में राज्य सभा सांसद कुंवर रेवती रमण के राजपरिवार का पैतृक माधवेंद्र मंदिर है। बाइस साल पहले 1995 में तीन देवियों लीला देवी, वेंकटेश्वरी देवी और भुज देवी की मूर्तियां चोरी हो गईं थीं। मामला राजपरिवार और लोगाें की आस्था से जुड़ा था। इसलिए पुलिस से सक्रियता दिखाई और खबरी की सूचना पर मूर्तियों और मंदिर के टूटे ताले को कौवा गांव के खलिहान से बरामद कर लिया था। उसके बाद कानूनी प्रक्रिया के चलते मूर्तियों को पुलिस के संरक्षण में करछना थाने के मालखाने में जमा करा दिया गया था।
चोरी के मुकदमे की सुनवाई एसीजेएम पंचम कर रहे थे। बाइस साल की लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट के आदेश पर देवी मूर्तियों को माधवेंद्र मंदिर के पुजारी उमाकांत मिश्रा को ग्राम प्रधान विजय रमण की मौजूदगी में सुपुर्द कर दिया गया। लम्बे अरसे के बाद मूर्तियों के मंदिर में आने से क्षेत्र में खुशी की लहर है। उधर गांव के पुरनियों का मानना है कि अब देवियां मंदिर में आ गईं है तो क्षेत्र के हालात सुधर जाएंगे।
करछना के बरांव स्थित माधवेंद्र मंदिर से क्षेत्र के लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। गांव के बुजुर्ग लोग बताते हैं कि मंदिर कई सौ वर्ष पुराना है। वे और उनके दादा-बाबा भी इस मंदिर में पूजा करने आते थे। चूंकि यह मंदिर कुंवर रेवती रमण सिंह का पैतृक मंदिर है इसलिए उनकी भी आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। इसके अलावा बड़े बड़े नेता और अधिकारियों ने भी इस मंदिर में पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया है।