इलाहाबाद। इंदिरा गांधी जन्म शताब्दी के बहाने नगर निगम चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी ने अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई। राजर्षि टंडन मंडपम में आयोजित इंदिरा जन्म शताब्दी समारोह में अर्से बाद कांग्रेस के किसी कार्यक्रम में इतनी भीड़ जुटी। समारोह में भीड़ देखकर गदगद मुख्य अतिथि कांग्रेस के महासचिव एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गांधी परिवार के बलिदान से सीख लें। इस परिवार ने सुख-सुविधाएं छोड़ आजादी की लड़ाई लड़ी। विदेशी कपड़ों तथा सामानों की होली जलाई। आजाद ने इंदिरा गांधी को आइरन लेडी बताया। समारोह में राजबब्बर समेत अन्य कांग्रेसी नेताओं ने भी मोदी को निशाने पर रखा और नोटबंदी को सरकार की विफलता बताया।
कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इंदिरा जी एक आकर्षक शख्सियत थीं। उन्होंने 1974 में पोखरण परीक्षण किया। मात्र 14 दिन की लड़ाई में बांग्लादेश का निर्माण कर दिया। मोदी सरकार पर तंज कसा कि आज एक सर्जिकल स्ट्राइक पर इतना हल्ला मचाया जा रहा है। कहा कि इंदिरा गांधी की हरित क्रांति का नतीजा है कि आज देश की 125 करोड़ से अधिक आबादी अनाज के मामले में आत्मनिर्भर है। उन्होंने इंदिरा को अन्नपूर्णा बताया। कहा, आज जरूरत है एकजुट होने की, ताकि देश को कमजोर करने वाली ताकतें परास्त हों। यह केवल कांग्रेस के नेतृत्व में ही संभव है।
समारोह में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। मोदी ने नोटबंदी लाकर खुद को नेहरू, शास्त्री, इंदिरा और राजीव गांधी की तरह पेश करने की कोशिश की, परंतु नाकाम रहे। नोटबंदी सफल नहीं होने पर कैशलेश इकोनॉमी ले आए, जो जनता के पास पैसा नहीं होने से नाकाम रही। अब कैशलेस फेल होने के बाद जनता को चोर साबित करने की कोशिश हो रही है। राम के नाम पर वोट की भीख मांगने वाले राम का नाम तो लेते हैं पर काम नहीं करते। कहा, यह इंदिरा जन्म शताब्दी का 10 वां पड़ाव है। इंदिरा की छवि कभी दुर्गा तो कभी झांसी की रानी जैसी दिखी। उन्होंने इलाहाबाद को आजादी के आंदोलन का केंद्र बताया।
कार्यक्रम प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि 1977 में सत्ता से बाहर होने के बाद लोग कांग्रेस के खात्मे की बात करने लगे थे तब उन्होंने 1980 में प्रचंड बहुमत से सत्ता में वापसी की। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल शास्त्री ने कहा कि इंदिरा में चुनौतियों से लड़ने का जुनून था। उन्होंने समस्याओं का सामना अपनी विशिष्ट शैली में किया। इंदिरा जैसी विभूति बिरले ही पैदा होती हैं। राज्यसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय सिंह ने कहा कि वह और उनका परिवार इंदिरा गांधी को व्यक्तिगत तौर पर जानते हैं। इंदिरा जैसी शख्सियत किसी की नहीं है। इस दौरान संजय ने पद्मावती फिल्म का विरोध किया और कहा कि इसमें इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा गया है। सांसद पीएल पूनिया ने इंदिरा को गरीबों एवं दलितों की मसीहा बताया।
शताब्दी समारोह का विषय प्रवर्तन शहर उत्तरी के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह ने, जबकि संगोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व महापौर चौधरी जितेन्द्र नाथ सिंह ने की। पूर्व सांसद सलीम शेरवानी, राणा गोस्वामी, विधायक अराधना मिश्रा मोना व दीपक सिंह, महापौर प्रत्याशी विजय मिश्रा, शेखर बहुगुणा, प्रदेश प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय, जेएन मिश्र, जावेद उर्फी, विजय प्रकाश, राम निहोर राकेश, रामयज्ञ द्विवेदी, फुजैल हाशमी, रमेश पांडे, हरिकेश त्रिपाठी, सुधाकर तिवारी, तलत अजीम, भगवती चौधरी, दिग्विजय सिंह, प्रमोद पाण्डेय, सुभाष पाण्डेय आदि मौजूद थे। अतिथियों का स्वागत जिलाध्यक्ष अनिल द्विवेदी तथा संचालन बाबा अभय अवस्थी ने किया।
एससी-एसटी आयोग के पूर्व अध्यक्ष पीएल पूनिया ने इंदिरा की ओर से लागू किए गए आपातकाल को अपने तर्कों के आधार सही साबित करने की कोशिश की। कहा कि देश में उस समय अराजकता का माहौल था। छात्र पढ़ाई लिखाई छोड़ आंदोलन में भाग ले रहे थे। लोग कानून को तोड़ने में आगे आ रहे थे, ऐसे में इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर देश में बढ़ रही अराजकता को रोका। कहा कि आपातकाल के दौरान 20 सूत्रीय कार्यक्रम के जरिए उन्होंने देश में ठप पड़े विकास को गति प्रदान की।