यह बलिया के श्याम बाबू का हौसला ही था कि कड़ी मेहनत, लगन और तन्मयता से जुटकर उन्होंने हेड कांस्टेबल से लंबी छलांग लगाकर डिप्टी कलेक्टरी हासिल कर ली। जिन्हें वह अब तक सलामी दिया करते थे, अब उनकी सलामी लेंगे। श्याम बाबू ने प्रयागराज में तैनाती के बाद पीसीएस परीक्षा की गंभीरता के साथ तैयारी की और सफल रहे। मेरिट में उनकी 52वीं रैंक है। मूल रूप से बलिया के इब्राहिमपुर के रहने वाले 33 वर्षीय श्याम बाबू के पिता धर्मनाथ की गांव में किराने की छोटी सी दुकान है।
मां किशोरी देवी गृहणी हैं। श्याम बाबू की पांच बहनें हैं और सभी का विवाह हो चुका है। बड़े भाई उमेश आयकर में इंस्पेक्टर हैं। श्याम बाबू ने सुदिष्ट बाबा इंटर कॉलेज रानीगंज से हाईस्कूल एवं इंटर की पढ़ाई की। वर्ष 2008 में स्नातक किया। हेड कांस्टेबल के पद पर नौकरी करते हुए 2013 में केबी पीजी कॉलेज मिर्जापुर से परास्नातक की पढ़ाई पूरी की और 2019 में प्राचीन इतिहास विषय के साथ यूजीसी नेट क्वालीफाई किया।
बकौल श्याम बाबू गांव में रहते हुए उन्हें मालूम ही नहीं था कि आईएएस-पीसीएस भी कुछ होता है। दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद गांव के लड़कों को पुलिस में कांस्टेबल भर्ती और सेना में जवानों की भर्ती के लिए मैदान में दौड़ने के लिए भेज दिया जाता था। श्याम बाबू जब मऊ में तैनात थे, तब उन्होंने पीसीएस परीक्षा में शामिल होने का निर्णय लिया। कुछ परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। दिसंबर-2014 में उनकी पोस्टिंग प्रयागराज में हुई। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का माहौल था, इसलिए वह जी-जान से जुट गए। पुलिस मुख्यालय में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात रहते हुए पीसीएस-2016 की परीक्षा इतिहास और समाजकार्य विषय से दी और डिप्टी कलेक्टर के पद पर उनका चयन हुआ।