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Prayagraj : तीन साल तक पांच पांच मुकदमों में बहस करने वाले वकीलों को भी मिलेगा मताधिकार

Thu, 12 Jun 2025 06:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बीते तीन वर्षों में पांच पांच (कुल 15) मुकदमों में बहस करने वाले वकीलों को भी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में मताधिकार मिलेगा। चुनाव समिति की ओर से लिए गए इस फैसले से उन युवा अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
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पत्रकारों से बातचीत करते मुख्य चुनाव अधिकारी राधाकांत ओझा और अन्य। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बीते तीन वर्षों में पांच पांच (कुल 15) मुकदमों में बहस करने वाले वकीलों को भी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में मताधिकार मिलेगा। चुनाव समिति की ओर से लिए गए इस फैसले से उन युवा अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिली है, जिनके नाम से मुकदमे दाखिल नहीं हुए है। यह जानकारी मुख्य चुनाव अधिकारी राधाकांत ओझा, चुनाव अधिकारी अनिल भूषण, वशिष्ठ तिवारी व महेंद्र बहादुर सिंह ने संयुक्त रूप से पत्रकार में दी है।

उन्होंने कहा कि चुनाव बायलॉज के मुताबिक ही होगा। मतदाता और प्रत्याशियों अहर्ता के लिए तीन साल तक पांच पांच मुकदमों की बाध्यता की शर्त लागू रहेगी। पांच पांच मुकदमों में वह मुकदमे भी शामिल होंगे जिनमें अधिवक्ता ने बहस की हो। इसके प्रमाण स्वरूप वकीलों की उस अदालती आदेश की प्रति पेश करनी होगी, जिनमें उनका नाम बहस करने वाले अधिवक्ता के रूप में अंकित हो।

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गौरतलब है कि चुनाव समिति की ओर से पांच पांच मुकदमों की बाध्यता को लेकर युवा अधिवक्ताओं के मताधिकार पर तलवार लटक रही थी। इसे लेकर अधिवक्ता और संभावित प्रत्याशियों की चिंता व गुस्सा बढ़ रहा था। सभी की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर चुनाव समिति ने अब शर्तों को लचीला किया है।

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अनंतिम मतदाता सूची पर ऑनलाइन आपत्तियां

गर्मी की छुट्टियों के दौरान 17 जून को जारी होने वाली अनांतिम मतदाता सूची पर घर बैठे ऑनलाइन आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे। चुनाव समिति अनांतिम मतदाता सूची के साथ व्हाट्सअप नंबर व ईमेल आईडी भी जारी करेगी।

नामांकन शुल्क में कमी के आसार नहीं

चुनाव समिति के समक्ष प्रत्याशियों ने नामांकन शुल्क में कमी करने की मांग को दोहराया है। हालांकि, चुनाव समिति राहत देने के मूड में नहीं है। प्रत्याशियों का कहना है कि इस बार का चुनाव हाईकोर्ट की नवनिर्मिति 14 मंजिली अधिवक्ता चैंबर और मल्टी लेवल पार्किंग में ही मतदान कराए जाने की योजना है। ऐसे में चुनाव खर्च में काफी कमी आएगी। लिहाजा, नामांकन शुल्क कम किया जाना चाहिए।

वहीं,चुनाव समिति का कहना है कि यह उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। इस संबंध में एल्डर कमेटी को ही फैसला लेना है। गौरतलब है कि पिछले चुनाव से ही नामांकन शुल्क में भारी इजाफा हुआ था। इसे लेकर विरोध हुआ था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इस बार फिर विरोध का सुर जोर पकड़ रहा है।

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