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शराब और शबाब के फेर में वकीलों ने मारा था साथी को

Sun, 24 Jan 2016 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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अधिवक्ता दीपचंद्र शुक्ला की हत्या का खुलासा करते हुए सिविल लाइंस पुलिस ने क्राइम ब्रांच की मदद से चार वकीलों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि शराब के नशे में कॉलगर्ल के चक्कर में हुए झगड़े के दौरान सूबेदारगंज में सुनसान में ले जाकर दीपचंद्र का पत्थर से सिर फोड़ दिया गया। फिर शव को कंबल में लपेटकर पेट्रोल डाल आग लगा दी गई। पुलिस ने वकील की पत्नी के बयान, कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और हाईकोर्ट के आसपास के चाट तथा पान विक्रेताओं से पूछताछ के बाद पांच आरोपियों की गिरफ्तार की तो उन सभी ने गुनाह कुबूल कर लिया। पुलिस ने वकील के कत्ल में इस्तेमाल लग्जरी कार के साथ ही घटनास्थल से खून सना पत्थर भी बरामद कर लिया है।
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मूल रूप से सिराथू के निकट साढ़ो गांव निवासी अधिक्ता दीपचंद्र शुक्ला बरसों से नैनी में छिवकी स्थित ससुराल में शिक्षिका पत्नी वीथिका के साथ रहने लगे थे। उनके दिवंगत ससुर अमरनाथ डिप्टी जेलर पद से रिटायर हुए थे। 17 जनवरी रविवार को वह सुबह बाइक पर घर से निकल गए थे। रात में उनकी जली लाश सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन के पास मिली थी। चार रोज तक तक जांच के बाद क्राइम ब्रांच प्रभारी जेपी राय, सर्विलांस सेल प्रभारी सुनील दुबे ने सिविल लाइंस इंस्पेक्टर महेश पांडेय के साथ मिलकर शुक्रवार रात हाईकोर्ट के  निकट टोयोटा कोरोला कार सवार पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। 
पकड़े गए लोगों में न्यू ममफोर्डगंज निवासी अधिवक्ता जयराज सिंह, बसंत बिहार कॉलोनी ड्रमंड रोड, सिविल लाइंस निवासी अधिवक्ता अजय कुमार मिश्रा, स्ट्रेची रोड सिविल लाइंस निवासी अधिवक्ता इंदीवर पांडेय, कालिंदीपुरम क़ॉलोनी में रहने वाले अधिवक्ता अभिषेक मयंक रस्तोगी उर्फ अंशू और अलीगढ़ में टप्पल इलाके का उसका मुंहबोला भांजा अरुण कुमार तालान है। कार अभिषेक उर्फ अंशू की है। एसएसपी केएस इमैनुएल के मुताबिक,  इन वकीलों के साथ दीपचंद्र का रोज  मिलना-जुलना था। रविवार को भी दीपचंद्र हाईकोर्ट के पास लक्ष्मी भोजनालय पहुंचे जहां अभिषेक रस्तोगी अपने भांजे अरुण तालान के साथ कार में मौजूद था। 
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दीपचंद्र ने फोनकर अजय मिश्र और जयराज सिंह को भी बुला लिया। सबने कार में बैठकर शराब पी। देर शाम तक पास की दुकान से कई बार शराब लाई गई। जयराज की स्कूटी की डिग्गी से भी बोतल लाकर खोली गई। एसएसपी के अनुसार, नशे में धुत होने के बाद वे दीपचंद्र से कॉलगर्ल की व्यवस्था करने को कहने लगे। पुलिस का दावा है कि जयराज ने कॉलगर्ल का इंतजाम करने के लिए दीपचंद्र को पैसे भी दिए थे। लड़की के चक्कर में दीपचंद्र पहले उन लोगों को ममफोर्डगंज की तरफ ले गए। वहां बात नहीं बनी तो झलवा चलने के लिए कहा। झलवा जाते वक्त रास्ते में जयराम ने कार सूबेदारगंज में सुनसान की तरफ यह कहकर मुड़वा दी कि लड़की को वहीं बुलाया जाएगा। सुनसान में टायलेट के लिए उतरने पर जयराम और दीपचंद्र के बीच झड़प होने लगी। 
तैश में आकर जयराम ने दीपचंद्र के भारी सिर पर पत्थर से वार किए। वह घायल होकर गिरे तो इंदीवर ने उनके पैर पकड़ लिए जबकि अजय ने अपने पैर से उनका गला दबाया। जयराम ने सिर पर पत्थर से वार किए। दीपचंद्र की मौत होने पर उनका सिर एक पॉलीथिन में ढका। शव को डिग्गी में रखकर हाईकोर्ट के पास पहुंचे। वहां जयराम ने एक बोतल में पेट्रोल लिया। कंबल का इंतजाम किया। वे फिर सूबेदारगंज पहुंचे। शव को कंबल में लपेट पेट्रोल डालकर आग लगा भाग गए। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद घटनास्थल से दीपचंद्र की हत्या में प्रयुक्त रक्तरंजित पत्थर भी बरामद कर लिया है।
अधिवक्ता दीपचंद्र शुक्ला की हत्या में संदिग्ध वकीलों के नाम उनकी पत्नी वीथिका ने ही पुलिस को बता दिए थे। दरअसल, रविवार रात देर होने पर जब दस बजे के बाद वीथिका ने दीपचंद्र के मोबाइल पर फोन किया तो कॉल जयराम ने रिसीव की और कहा कि अभी नेताजी से बात नहीं हो सकती। वीथिका ने जयराम और अभिषेक रस्तोगी की आवाज पहचान ली। उनसे पहले भी बात हो चुकी थी। जयराम ही दीपचंद्र को नेता जी कहता था। वीथिका ने पुलिस को इस बारे में बताया तो उन दोनों को मुख्य संदिग्ध मानकर हिरासत में लिया गया तो हत्याकांड़ का पर्दाफाश हो गया।
दीपचंद्र हत्याकांड में पुलिस ने शराब के नशे में कॉलगर्ल को लेकर हुए झगड़े को कारण बताया है लेकिन इसमें कुछ और रहस्य होने की बात कही जा रही है। पता चला है कि दीपचंद्र के पास भी लाइसेंसी पिस्टल थी लेकिन उसे पुलिस नहीं बरामद कर सकी। इस बारे में पूछने पर एसएसपी और एसपी सिटी सटीक जवाब नहीं दे सके। मोबाइल के बारे में बताया कि जयराम ने पत्नी वीथिका का फोन आने पर बात करने के बाद तोड़कर जेब में डाल लिया था। शनिवार शाम पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता के दौरान मौजूद पत्नी वीथिका ने खुलासे पर सवाल उठाते हुए कहा कि कातिल तो यहीं है लेकिन वजह कुछ और है जो पुलिस उजागर नहीं कर सकी। जयराम ने किसी और कारण से उनके पति का कत्ल किया है।
रविवार को नशे में धुत वकीलों ने काफी हंगामा किया था। जयराम और अभिषेक रस्तोगी आदि पहले कॉलगर्ल के लिए पहले ममफोर्डगंज गए। वहां से झल्लाकर लौटे तो सब चाट खाने हाईकोर्ट के पास एक ठेले पर पहुंचे। चाट विक्रेता से गालीगलौज और मारपीट कर डाली। वहां कई महिलाएं भी मौजूद थीं। चाट विक्रेता ने भी इस बारे में जांच के दौरान पुलिस पूछताछ में पुष्टि की।
इलाहाबाद। एसएसपी का दावा है कि हत्या की वारदात के बाद रात में जयराम और इंदीवर आदि ने घटना में साथ रहे वकील अभिषेक रस्तोगी को  धमकाया कि इस बारे में मुंह बंद रखना। यह इलाहाबाद है। किसी से बताया तो तुम और तुम्हारे भांजे अरुण को जिंदा नहीं छोड़ा जाएगा। ये सभी अधिवक्ता नशे और शबाब के शौकीन रहे हैं। हत्या के बाद दूसरे रोज ये दीपचंद्र की पत्नी वीथिका के साथ सिविल लाइंस थाने में अपहरण का मुकदमा भी दर्ज कराने गए थे। मारे गए दीपचंद के बारे में एसएसपी का कहना है कि वह यूपी बार एसोसिएशन के पंजीकृत सदस्य थे लेकिन हाईकोर्ट या जिला अधिवक्ता संघ में उनका पंजीकरण नहीं था। हालांकि उनका हाईकोर्ट आना-जाना लगा रहता था। 
हत्याकांड का चार दिन के भीतर खुलासा करने पर एसएसपी केएस इमैनुएल ने एसपी सिटी राजेश यादव, सीओ प्रथम रूपेश सिंह, सीओ राजवीर सिंह, इंस्पेक्टर महेश पांडेय, क्राइम ब्रांच प्रभारी जेपी राय, उपनिरीक्षक सुनील दुबे, जीतेंद्र पाल सिंह, जुलकर नैन, अभय सिंह, गुलाब साबिर, पवन सिंह, ज्ञानेंद्र राय, विनय राय की सराहना की। पुलिस अफसरों ने टीम के साथ रात भर छानबीन और पूछताछ की। 
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