मामला झांसी के सिपरी बाजार थाना क्षेत्र का है। याची भानु प्रताप ने 2023 में धोखाधड़ी और कूटरचना के आरोप में दर्ज मामले में पहली बार अग्रिम जमानत अर्जी अधिवक्ता फातिमा खातून के जरिये दाखिल की थी। बहस के दौरान अधिवक्ता ने यह कहते हुए जमानत अर्जी वापस ले ली कि याची नियमित जमानत अर्जी दाखिल करेगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मुवक्किल की पूर्व सहमति बगैर वकील को मुकदमा वापस लेने का हक नहीं है। यह गंभीर व्यवसायिक कदाचार है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विक्रम डी.चौहान की अदालत ने अधिवक्ता फातिमा खातून को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। पूछा कि मुवक्किल की पूर्व सहमति के बगैर उन्होंने अग्रिम जमानत अर्जी वापस कैसे ली।
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मामला झांसी के सिपरी बाजार थाना क्षेत्र का है। याची भानु प्रताप ने 2023 में धोखाधड़ी और कूटरचना के आरोप में दर्ज मामले में पहली बार अग्रिम जमानत अर्जी अधिवक्ता फातिमा खातून के जरिये दाखिल की थी। बहस के दौरान अधिवक्ता ने यह कहते हुए जमानत अर्जी वापस ले ली कि याची नियमित जमानत अर्जी दाखिल करेगा। इसके बाद याची ने दूसरी अग्रिम जमानत अर्जी अन्य अधिवक्ता के माध्यम से दाखिल की।
कहा कि पहली जमानत अर्जी वापस लेने के लिए उसने अधिवक्ता फातिमा खातून को कोई निर्देश नहीं दिया था। कोर्ट ने अधिवक्ता फातिमा खातून को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अब मामले की सुनवाई 24 जनवरी को होगी।