करेली के बक्शीमोढ़ा में युवक की हत्या के मामले में नामजद कई आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी है। कोई थाने का हिस्ट्रीशीटर है तो कोई गैंगस्टर के मामले में वांटेड चल रहा है। कुछ गोकशी के मामले में जेल भी जा चुके हैं। ग्रामीणों की माने तो इलाके में उनकी दबंगई के चर्चे आम हैं। हालांकि दहशत के चलते कोई उनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर पाता।
पुलिस के मुताबिक, इस हत्याकांड में नामजद पांच आरोपी एक ही परिवार से हैं। मामले में नामजद सादिक पर करेली के साथ ही खुल्दाबाद, धूमनगंज थाने में 27 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं और वह करेली थाने का हिस्ट्रीशीटर भी है। मामले में नामजद एक अन्य आरोपी सेबू उसका बेटा है। नौशाद, जाकिर अली और नूर अख्तर सगे भाई हैं और वह सादिक के साले हैं।
बता दें कि सादिक की पत्नी रुखसाना राजू पाल हत्याकांड की गवाह भी है। पुलिस का कहना है कि नौशाद गांव का पूर्व प्रधान है और उस पर भी दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। उधर सोमवार को गिरफ्तार छठा आरोपी फारुख करीब 2 महीने पहले गोकशी के मामले में जेल भेजा गया था। वह गैंगस्टर के मामले में वांटेड भी चल रहा था। इसी तरह एक अन्य आरोपी नौशाद पुत्र गुलशेर का भी नाम गोकशी के मामले में सामने आ चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और आए दिन गांव में दबंगई करते हैं। मामूली बातों पर लोगों को मारना पीटना, गालीगलौज करना उनका आए दिन का काम है।
लाकडाउन के दौरान आखिर कैसे भाग निकले बदमाश
करेली के बख्शीमोढ़ा में युवक की हत्या के बाद बदमाशों के मौके से भाग निकलने को लेकर भी तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। दरअसल लॉकडाउन के चलते ना सिर्फ करेली बल्कि पूरे शहर में कड़ी चौकसी बरती जा रही है। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है ताकि किसी प्रकार का आवागमन ना हो सके। साथ ही इन प्वांइट्स पर पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं। इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद हत्यारोपियों का भाग निकलना पुलिस पर भी सवाल खड़े करता है। यह हाल तब है जब घटना के कुछ ही देर बाद एसओजी व स्वाट टीम को बदमाशों की तलाश में लगा दिया गया था।