आईटी बाजार में मंदी के बावजूद महंगाई का बड़ा झटका लगा है। पिछले दो महीनों में लैपटॉप, कंप्यूटर और प्रिंटर की कीमतों में 10 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। कंप्यूटर हार्डवेयर पार्ट्स के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। इस अचानक वृद्धि ने छात्रों, कामकाजी पेशेवरों और मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट को प्रभावित किया है।
कंप्यूटर को असेंबल करने में इस्तेमाल होने वाले प्रोसेसर, कैबिनेट, मॉनिटर और प्रिंटिंग पेपर के दामों में भी तेजी आई है। कारोबारी धनंजय सिंह के अनुसार, 14 से 20 हजार रुपये के प्रिंटर अब 16 से 25 हजार रुपये में मिल रहे हैं। यूपीएस की कीमत भी 2500-6000 रुपये से बढ़कर 3000-7000 रुपये हो गई है।
कारोबारी शिवशंकर सिंह ने बताया कि कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारण हैं। दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी युद्ध और तनाव से वैश्विक व्यापारिक मार्ग प्रभावित हुए हैं। इससे माल ढुलाई का खर्च काफी बढ़ गया है। एक लैपटॉप जो पहले 38 से 40 हजार रुपये में बिक रहा था, उसकी कीमत अब 50 हजार रुपये से अधिक हो गई है।
सेमीकंडक्टर चिप्स की वैश्विक कमी की समस्या अभी भी बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय आयातकों के लिए तकनीकी सामान की लागत बढ़ गई है। कंपनियां इस बढ़े हुए बोझ को अब ग्राहकों पर डाल रही हैं।-महेंद्र गोयल, प्रदेश अध्यक्ष, कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स
लैपटॉप और कंप्यूटर की कीमतों में सीधी बढ़ोतरी होने से शोरूम पर आने वाले ग्राहकों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। कई लोग अब खरीदारी टाल रहे हैं। - विपिन गुप्ता, कारोबारी
कंप्यूटर पार्ट्स जैसे रैम, प्रोसेसर और कीबोर्ड की कीमतों में भी 10 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा रही है, जिससे पुराना सिस्टम रिपेयर कराना भी अब महंगा सौदा साबित हो रहा है। - सौरभ गुप्ता, कारोबारी