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देवी के कूष्मांडा स्वरूप का पूजन

Sat, 17 Oct 2015 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। नवरात्र के चौथे दिन शुक्रवार को देवी के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा अर्चना हुई। मंगला आरती से लेकर निशाआरती में शामिल होने के लिए प्रमुख सिद्धपीठों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सिद्धपीठों में शतचंडी, दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा रहा है। घर-घर देवी महिमा गाई जा रही है।
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मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिता देवी मंदिर में त्रिपुर सुंदरी मां ललिता देवी का शृंगार बहुरंगी फूलों से  कूष्मांडा स्वरूप में किया गया। मंगला आरती के साथ भक्तों की कतार लगनी शुरू हुई। आचार्य पुरोहितों की देखरेख में होने वाले शतचंडी यज्ञ में विश्वकल्याण के निमित्त आहुतियां डाली गईं। त्रिपुर सुंदरी ललिता देवी का महात्म्य बताते हुए समिति के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा ने कहा, ललिता देवी पंच प्रेत पर आसीन हैं और यह आसन साधारण नहीं वरन ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि ही हैं। भजन संध्या के बाद निशा आरती हुई। इस अवसर पर धीरज नागर आदि ने व्यवस्था संभाली।

चौक गंगादास स्थित खेमामाई मंदिर में पट खुलने के बाद पूजन और शाम को शृंगार दर्शन को श्रद्धालु जुटे। हाईकोर्ट हनुमान मंदिर के अष्टभुजी मंदिर, हनुमत निकेतन के दुर्गा मंदिर, सिद्धेश्वरी गुप्त महापीठ, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, कर्नलगंज व कटरा कालीबाड़ी, चौफटका, समियामाई सहित देवी के विभिन्न मंदिरों में दुर्गा सप्तशती, शतचंडी के पाठ हुए। शनिवार को देवी पांचवें स्वरूप स्कंदमाता का पूजन होगा।
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कल्याणी देवी मंदिर में कल्याणी देवी का कूष्मांडा स्वरूप में शृंगार श्याम जी पाठक की देखरेख में किया गया। उसके पहले दोपहर 108 कमल पुष्पों से देवी का पूजन किया गया। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ हुआ। शाम को देवी के शृंगार दर्शन का क्रम शुरू हुआ जो देर रात तक चला। स्वर्ण, चांदी के आभूषणों और बहुरंगी फूलों का मनोहारी शृंगार देख श्रद्धालुओं भाव विभोर होते रहे। मंदिर के आसपास लगी दुकानों से मेले का माहौल है।

अलोपीबाग स्थित अलोपशंकरी मंदिर में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं का तांता लगा। देवी का पालना छूने के लिए घंटों लोगों ने इंतजार किया। जिनकी मनौती पूरी हुई है वह लोग गाजे-बाजे के साथ निशान चढ़ाने को आए। मंदिर परिसर में चौथे दिन भी मुंडन छेदन कराने वालों का जमावड़ा रहा। प्रधान पुजारी शिवानंद पुरी की देखरेख में  ब्रह्म मुहूर्त से आरंभ हुआ पूजन-अर्चन का क्रम देर रात तक चलता रहा।
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