कुंभ की धरती ने खोए श्रद्धालुओं को निराश होने का मौका नहीं दिया। संगम की धरती ने पल भर के लिए गम दिया तो हंसाया भी। पूरे मेले के दौरान कुल तीस हजार से अधिक लोग अपनों से बिछड़ गए। जिसमें 29640 महिलाओं और छह सौ बच्चे रहे। जिन्हें मिलाने का पुनीत कार्य भूले-भटके शिविर ने किया। इन्हें खोजने के लिए शिविर के सदस्यों ने एनाउंसमेंट ही नहीं किया बल्कि मोबाइल और गूगल का भी इस्तेमाल किया। कुंभ की भव्यता और दिव्यता के लिए सरकार और मेला प्रशासन ने पूरा जोर लगा दिया। मेला पर्व के दौरान सभी सुविधाएं अखाड़ों के संतों-महंतोंं के साथ कल्पवासियों को दिया और गंगा के स्वच्छ अविरल धारा में पुण्य की डुबकी भी लगाई।
ऐसे में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सेक्टर चार में प्रशासन और हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समित की ओर से खोया-पाया शिविर बनाया गया। ताकि मेला पर्व के दिन स्नान, ध्यान के दौरान अपनों से बिछडऩे वालों को अपनों से मिलाया जा सके। स्वयंसेवी संस्था के इस आकड़े पर नजर डालें तो मकर संक्रांति के दिन 2720 महिलाएं, साठ बच्चे, पूर्णिमा के दिन950 महिलाएं, 85 बच्चे, मौनी अमावास्या पर 12900 महिलाएं, 200 बच्चे, बसंत पंचमी पर 8995 महिलाएं, 95 बच्चे और माघी पूर्णिमा के दिन 4065 महिलाएं व 160 बच्चे रहे। जिनके परिजनों को शिविर में बुलाकर सौंपा गया। समिति के संचालक और शिविर प्रभारी संत कुमार पांडेय ने बताया कि इसमें अधिकतर महिलाएं मध्यप्रदेश और बिहार की थीं। जो नहीं मिले उन्हें उनके पते पर समिति ने अपने खर्चे से भेज दिया।
छः वर्षीय बच्ची ज्योति केंद्र को सौंपा
भूले-भटके शिविर प्रभारी संत कुमार पांडेय ने बताया कि माह भर चले इस मेले में एक छह वर्षीय बच्ची के परिजन नही आए। कई बार प्रयास करने के बाद भी इसके परिजनों का पता नहीं चला तो इस
बच्ची को आशा ज्योति केन्द्र को सौंप दिया गया।
खोया-पाया केन्द्र का हुआ समापन
सेक्टर चार में भूली-भटकी महिलाओं तथा बच्चों के शिविर का समापन मंगलवार को हो गया। इसका समापन शिविर संयोजिका विनीता बहुगुणा तथा समिति के राष्ट्रीय सचिव शेखर बहुगुणा ने शिविर में पूजन-हवन करके किया। इस मौके पर शिविर प्रभारी संत कुमार पांडेय, शिवानी सिंह सेंगर, लता सिंह सेंगर, सीमा सिंह, सुधा कांत, पुनीता सिंह आदि लोग मौजूद रहे।