पीएम मोदी ने गंगा पंडाल में मौजूद लोगों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में पहले गंगा मैया का जयकारा लगाया। उन्होंने कहा कि, प्रयाग की भूमि पर मैं एक बार फिर आकर अपने आप को धन्य महसूस कर रहा हूं। मुझे संगम के तट पर स्नान और पूजा करने का परम सौभाग्य मिला। प्रयागराज से तप का पुराना नाता रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि, सफाई कर्मियों के योगदान से इस बार कुंभ की पहचान स्वच्छ कुंभ के रूप में हुई। मां गंगा की प्रबलता को लेकर भी इस बार खासी चर्चा है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के जरिए ये जान रहा था। आज यहां आकर खुद भी अनुभव किया। नमामि-गंगे के लिए अनेक स्वच्छाग्रही तो योगदान दे ही रहे हैं, आर्थिक रूप से भी मदद कर रहे हैं।
मैंने भी इसमें छोटा सा योगदान किया है। सियोल पीस प्राइजज के तौर पर मुझे जो 1 करोड़ 30 लाख रुपए की राशि मिली थी, उसको मैंने नमामि-गंगे मिशन के लिए समर्पित कर दिया है। पिछले साढ़े चार वर्षों में मुझे जो भी उपहार मिला उसकी निलामी करके उस राशि को मां गंगा को समर्पित कर दिया। मां गंगा को समर्पित प्रहरी हमारे नाविक भी हैं। प्रयागराज और नाविकों का पुराना संबंध है। बिना नाविकों के तो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की रामायण भी पूरी नहीं होती है। जो दुनिया को पार लगाते हैं उनकी नैय्या हमारे नाविक साथियों ने पार लगाया है। पीएम ने नाविकों को संबोधित करते हुए कहा कि, आप खुद को भगवान राम का सेवक मानते हैं और मैं खुद को आपका प्रधान सेवक मानता हूं...
पीएम मोदी ने कहा कि, साथियों जब प्रयागराज में कुंभ लगता है तो सारा प्रयागराज ही कुंभ हो जाता है। प्रयागराज के निवासी भी श्रद्धेय हो जाते हैं। प्रयागराज को विकसित करने और कुंभ को सफल करने में प्रयागराजवासियों की भी मुख्य भूमिका रही है। प्रयागराज में पहले जब मेला लगता था तो अस्थायी सुविधाएं होती थी, लेकिन इस बार ऐसी स्थायी सुविधाओं का निर्माण हुआ है जो लंबे समय तक प्रयागराज के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देगा।
पीएम ने कहा कि, इस साल 2 अक्टूबर से पहले पूरा देश खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने की तरफ आगे बढ़ रहा है और मैं समझता हूं, प्रयागराज के आप सभी स्वच्छाग्रही, पूरे देश के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बनकर सामने आए हैं। गंगाजी की ये निर्मलता नमामि-गंगे मिशन की दिशा और सरकार के सार्थक प्रयासों का भी उदाहरण है। इस अभियान के तहत प्रयागराज गंगा में गिरने वाले 32 नाले बंद कराए गए हैं। सीवर-ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से गंगा नदी में प्रदूषित जल को साफ करने के बाद ही प्रवाहित किया गया।
पिछली बार मैं जब यहां आया था तो मैंने कहा था कि इस बार का कुंभ अध्यात्म, आस्था और आधुनिकता की त्रिवेणी बनेगा। मुझे खुशी है कि आप सभी ने अपनी तपस्या से इस विचार को साकार किया है। तपस्या के क्षेत्र को तकनीक से जोड़ कर जो अद्भुत संगम बनाया गया उसने भी सभी का ध्यान खींचा है।
पीएम मोदी ने कहा कि- आज मेरा जीवन धन्य हो गया। साधु-महात्माओं के आशीर्वाद तो मिलते रहते हैं। उनसे मुलाकात भी होती रहती है, लेकिन आज मेरे लिए तपस्वी आप (स्वच्छताकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों) हैं। मेरे लिए सच्चे सेवक आप हैं। साधु-महात्माओं के आशीर्वाद से, उनसे मिली शिक्षा-दीक्षा से आज मैं आपके बीच खड़ा हूं। मैं सभी को धन्यवाद देता हूं।
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने गंगा, यमुना और सरस्वती मैया का जयकारा लगवाया।