प्रयागराज कुंभपर्व के छठे और अंतिम स्नानपर्व महाशिवरात्रि पर सोमवार को संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे। इसके तहत अनेक शंकराचार्य, संत-महात्मा और महाशिवरात्रि का संकल्प लेकर रेती पर रुके कल्पवासी भी महाशिवरात्रि पर डुबकी लगाकर शिवार्चन करेंगे। कुंभपर्व के ग्रहीय संयोग के कारण इस बार महाशिवरात्रि पर प्रयागराज के संगम क्षेत्र में डुबकी लगाना सर्वाधिक पुण्यदायी है। ज्योतिर्विदों के अनुसार अबकी महाशिवरात्रि कई शुभतादायी संयोंगों के कारण विशेष फलदायी है।
तीन मार्च को दिन में 2.10 बजे त्रयोदशी तिथि का संचरण आरंभ हो जाएगा। चार मार्च को दिन में 4.10 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहने के बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। ऐसे में प्रदोष एवं निशीथ काल मे चतुर्दशी तिथि मिलने से महाशिवरात्रि व्रत पर्व चार मार्च को ही होगा।
सोमवार की महाशिवरात्रि भगवान भोलेनाथ के व्रत, पूजन, अभिषेक के लिए अत्यंत पुण्य प्रदान करने वाली है। श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं महामृत्युंजय के जप दर्शन, पूजन के साथ-साथ रात्रि जागरण करते हुए शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। सोमवार को चतुर्दश लिंग पूजन के साथ ही वैद्यनाथ जयंती भी मनायी जाएगी। हालांकि महाशिवरात्रि व्रत का पारण पांच मार्च को किया जाएगा।
सावन की तरह की श्रद्धालु संगम स्नान के बाद गंगा, संगम का जल लेकर विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करने को जाएंगे। उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी ‘पूर्वांचली’ के मुताबिक कुंभपर्व में ग्रहों के शुभफल, सोमवार के शुभतादायी संयोगों के कारण ही अबकी महाशिवरात्रि पर व्रत एवं भोलेनाथ का पूजन, अभिषेक विशेष पुण्यदायी होगा।