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कड़े फैसले लेने के मूड में विहिप, धर्म संसद में मंदिर निर्माण की हो सकती है घोषणा

Tue, 29 Jan 2019 12:38 AM IST
रचना शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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अयोध्या में राम मंदिर मामले में 29 जनवरी को होने वाली सुनवाई टलने से विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों में रोष है। विहिप के साथ तमाम साधु संत इंतजार कर रहे थे कि 29 जनवरी को इस संबंध में कोई न कोई निर्णय लिया जाएगा।

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सुनवाई टलने के बाद विहिप पदाधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि धर्म संसद में धर्माचार्यों की मौजूदगी में तय कर दिया जाएगा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कब शुरू किया जाएगा। पिछले दिनों विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने भी प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि वे अब मंदिर पर फैसले का और इंतजार नहीं कर सकते। दरअसल, विहिप की धर्म संसद 31 जनवरी और एक फरवरी को कुंभ नगर में आयोजित है। इसके आयोजन को लेकर पिछले कई दिनों से विहिप शिविर में तैयारी की जा रही है।
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चर्चा इस बात की है कि धर्म संसद में संतों की मौजूदगी में विहिप राम नवमी से मंदिर निर्माण का काम शुरू करने का एलान कर सकती है। उधर, सोमवार को अयोध्या मामले में सुनवाई टलने से विहिप नेता खासे नाराज दिखे। प्रांत संगठन मंत्री मुकेश जी ने कहा कि केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने पिछले दिनों ही प्रेस कांफ्रेंस में कह दिया था कि इस मामले में सुनवाई टलेगी। ऐसा हुआ भी। विहिप के केंद्रीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी के मुताबिक अब राम मंदिर के लिए और इंतजार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से कुंभ नगरी में हो रही धर्म संसद में मंदिर निर्माण को लेकर ठोस निर्णय ले लिया जाएगा। धर्म संसद में देश भर के सभी प्रमुख संत भी शिरकत कर रहे हैं। इन संतों के एक ही छत के नीचे आने से राम मंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

विहिप के प्रदेश प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि,‘सुनवाई का अब और इंतजार नहीं किया जा सकता। दो दिन बाद होने वाली धर्म संसद में राममंदिर निर्माण की तारीख को लेकर धर्माचार्य अपना निर्णय देंगे।'

कांग्रेस के इशारे पर टल रही सुनवाई : वेदांती    

अयोध्या मामले की सुनवाई टलने से पक्षकार मायूस, संत नाराज

 अयोध्या मामले की सुनवाई  एक बार फिर टलने से जहां पक्षकार मायूस हैं, वहीं संत-धर्माचार्यों की नाराजगी बढ़ी है। रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कांग्रेस के इशारे पर सुनवाई टाले जाने की बात कही।  कहा, कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने एक याचिका देकर मामले की सुनवाई लोकसभा चुनाव के बाद करने की अपील की थी, लगता है अब चुनाव के बाद ही सुनवाई की तैयारी है। उन्होंने कहा कि रामजन्मभ्ूामि सुनवाई के लिए न्यायाधीश नहीं मिल रहे हैं यह आश्चर्य की बात है, संत इस पर गंभीर विचार कर रहे हैं। 

उधर, संतों ने भी चेतावनी दी है कि अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है। विहिप ने कहा है कि अब प्रतीक्षा नहीं होगी। 31 जनवरी व 1 फरवरी को कुंभ में होने जा रही धर्मसंसद में संत-धर्माचार्यों के निर्देश पर राममंदिर मामले में एक बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।

दूसरी तरफ मुस्लिम पक्षकार भी सुनवाई टलने से मायूस हैं। उनका कहना है कि यदि इस मामले के समाधान में बहुत देर हुई तो दोनों समुदायों के बीच भाईचारा प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाएगा। मुस्लिम पक्षकारों ने मुख्यमंत्री योगी के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि अयोध्या मामला उन्हें सौंप दिया जाए तो 24 घंटे के भीतर राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

अब जवाब दे रहा है धैर्य

श्रीरामजन्मभूमि न्यास के सदस्य महंत कमलनयन दास ने कहा कि अब हमारा धैर्य जवाब देर रहा है। अभी तक हम सरकार व सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहे थे, लेकिन बार-बार तारीख मिलने से यह तय हो गया है कि न तो सरकार और न ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले को लेकर गंभीर है। धर्मसंसद में इस पर बड़ा निर्णय होगा। 

सुप्रीम कोर्ट की बेरुखी चिंतनीय

निर्मोही अखाड़ा के महंत व हिंदू पक्षकार दिनेंद्र दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या मामले में की जा रही बेरुखी चिंतनीय है। आखिर हमारे रामलला कब तक टेंट में विराजमान रहेंगेे। अब हम और प्रतीक्षा नहीं कर सकते, जल्द से जल्द समाधान होना चाहिए। 

हम भी बना सकते हैं 24 घंटे में मस्जिद

पक्षकार इकबाल अंसारी ने मुख्यमंत्री योगी के बयान पर कहा कि हमें मौका मिल जाए तो हम भी 24 घंटे में मस्जिद बना सकते हैं, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में है इसलिए न तो योगी और न ही पक्षकार कुछ कर सकते हैं। हम भी चाहते हैं मामले का जल्द समाधान हो। सुप्रीम कोर्ट जो निर्णय देगी, वही मानेंगे।

 

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सीएम योगी आदित्यनाथ

योगी नहीं कर सकते मामले का समाधान

मुस्लिम पैरोकार हाजी महबूब ने कहा कि योगी जी इस मामले का समाधान नहीं कर सकते, उनके बस की बात नहीं है कि 24 घंटे के अंदर इस मसले को हल कर दें। मामले की सुनवाई जल्द से जल्द होनी चाहिए। देरी से आपसी भाईचारा व मनमुटाव बढ़ेगा। हम देश में अमन, शांति चाहते हैं।

संतों के आदेश पर लेंगे बड़ा निर्णय

विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा का कहना है कि देश के सबसे गंभीर विषय को लेकर सर्वोच्च न्यायालय स्वयं गंभीर नहीं है। कब तक हिंदू समाज के धैर्य की परीक्षा ली जाती रहेगी। 31 जनवरी व 1 फरवरी को कुंभ में होने वाली धर्मसंसद के बाद संतों के आदेश पर विहिप इस मामले में एक बड़ा निर्णय लेने की तैयारी में हैं। अब और प्रतीक्षा नहीं होगी।
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