मेला क्षेत्र के 16 में अंतर्राष्ट्रीय कथाकार जगद्गुरू अनंतानंद स्वामी डा. रामकलम दास वेदांती का सत्संग कार्यक्रम वेदांत नगर काशी में शुक्रवार को चला। भक्तों को भक्तिरसपान कराते हुए स्वामी जी अष्टम स्कंध कथा को सुनाते हुए कहा कि भगवान को अष्टम स्कंध बहुत ही प्रिय है। क्योंकि इसमें गजेन्द्र उद्धार, समुद्र मंथन, देवासुर संग्राम, वामन अवतार, मस्त्य अवतार और मोहनी रूप में विष्णु द्वारा अमृत बांटने की कथा है।
बसे अदभुत बात यह है कि समुद्र मंथन की कथा में ही भगवान के चार अवतार हो जाते हैं। अष्टम स्कंध के द्वारा पापाचार्यों पर अकुंश लगाते हुए बुद्धिमत्ता पूर्ण न्याय की स्थापना का मार्ग दिखलाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रचेता के दस पुत्र हैं, दसों पुत्र तेजस्वी थे। महर्षियों के समान सत पुरूष और पुण्यकर्मा माने जाते हैं। प्राचेतस मुनि ने अपने ही समान गुणशील वाले, कठोर वृत करने वाले एक हजार पुत्र उत्पन्न किए।
जिनका मोक्ष शास्त्र का अध्ययन देवर्षि नारद जी ने किया। जिससे वे सभी विरक्त होकर घर से निकल गए। तब प्रजा की सृष्टि करने की इच्छा से दक्ष ने अपने तपोबल से पचास कन्याएं उत्पन्न की। जिसमें दस कन्याएं धर्म को, कश्यप को और काल का संचालन करने में नियुक्त नक्षत्र स्वरूपा 27 कन्याएं चंद्रमा का ब्याह कर दी। मरीचि नंदन कश्यप ने अपनी 13 पत्नियों में से सबसे बड़ी दस कन्या भी उनसे इन्द्र आदि 12 आदित्यों को जन्म दिया। इसी बीच स्वामी अनंत श्याम देव महाराज जी ने भक्तों को सम्बोधित किया।