कुंभ नगरी पहुंचे आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर ने प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परमात्मा को जानने के लिए अंतरात्मा से प्रेम करें। उन्होंने कहा कि हमें औपचारिकता से दूर रहकर मां के वात्सल्य रूपी प्यार को अपनाना चाहिए, क्योंकि मां और पड़ोसी के प्यार-व्यवहार में फर्क होता है। मां दिल से दुआ देती है
इलाहाबाद मेेडिकल एसोसिएशन (एएमए) के सभागार में सीए एसोसिएशन के कार्यक्रम में श्री श्री रविशंकर ने शिक्षा, सहिष्णुता, बीमारी, राजनीति जैसे अनेक सवालों का जवाब देते हुए कहा सभी मर्ज का एक इलाज है'इनरफीलिंग। उन्होंने कहा कि यदि मैं कहूं कि मुझे किसी सवाल का जवाब नहीं आता तो क्या करेंगे। चुप्पी न टूटने पर वह बोले, तनाव बड़ी समस्या है, इसे दूर करें। श्री श्री ने सुदर्शन क्रिया का अभ्यास करने की सलाह दी। कहा कि ध्यान, प्रणायाम अपनी आत्मा को जानने, खुद को पहचानने का साधन है। दिनचर्या में इनके लिए सिर्फ २० मिनट दें, सब कुछ पा जाएंगे।
श्री श्री रविशंकर ने अमेरिका में अपने एक कार्यक्रम का जिक्र किया। उन्होंने कहाकि वहां डॉक्टरों के बीच गए तो पाया कि ६७ प्रतिशत चिकित्सक बीमार हैं। इसलिए अपनी सेहत का भी ख्याल रखें, आप धरती के नारायण हैं। उन्होंने कहाकि होलेस्टिक एप्रोच होनी चाहिए। आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री ने कहा कि वर्तमान में एलोपैथ उपचार का सशक्त माध्यम है। वहीं आयुर्वेंद में लीवर की बीमारियों का शर्तियां इलाज है। उन्होंने कहाकि इलाज से पहले बीमारी का परीक्षण जरूरी है, इसलिए नाड़ी परीक्षण का ज्ञान आवश्यक है। बिना जांच बीमारी पकडऩे की यह विधा आज भी कारगर है, आप लोग चाहें तो हम आपको प्रशिक्षण दे सकते हैं।
इस मौके पर आईएमए के डॉ. अशोक अग्रवाल, एसकेएस चौहान, राधारानी घोष, डॉ. सुबोध जैन, डॉ. बीके मिश्रा, डॉ. युगांतर पांडेय, समेत बड़ी संख्या में डॉक्टर, चार्टड एकाउंटेंट आदि मौजूद रहे। वहीं श्री श्री ने परमार्थ निकेतन के शिविर में स्वामी चिदानंद मुनि से मुलाकात की और लोगों को मिलजुल कर रहने का संदेश दिया।