Shankaracharya Swami Swaroopanand Saraswati
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती प्रयागराज के कुंभपर्व में हुई परम धर्म संसद के फैसले पर अडिग हैं। बृहस्पतिवार को अस्वस्थ होने पर वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उनके संकल्प में कोई कमी नहीं आई है। अस्वस्थता के बावजूद रवानगी से पूर्व ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने पूरी दृढ़ता से कहा कि परमधर्म संसद में तय योजना के मुताबिक अयोध्या जाकर राममन्दिर के लिए वेदोक्त तरीके से 21 फरवरी को इष्टिका (ईंट) शिला पूजन किया ही जाएगा। इसके लिए यदि गोली खानी या जेल भी जाना पड़े तो हम तैयार हैं। देश के विभिन्न भागों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियत तिथि पर अयोध्या पहुंचेंगे।
शंकराचार्य के राम मंदिर निर्माण संकल्प को लेकर शासन-प्रशासन स्तर पर बेचैनी शुरू है। मनकामेश्वर मंदिर में मिलने आए अयोध्या के पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने उनके कार्यक्रम की जानकारी के बाद उन्हें याद दिलाया कि वहां जाकर कोई भी काम करना अदालत के आदेश की अवहेलना होगी तो उन्होंने दो टूक कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए किसी भी आदेश की अवहेलना स्वीकार्य है।
यह अवज्ञा नहीं सविनय अवज्ञा है, जो हिंदू हितों के लिए जरूरी है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार इस मामले में लगातार हीलाहवाली कर रही है, ऐसे में यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। राम मंदिर निर्माण के क्रम में कुंभ मेला क्षेत्र के शंकराचार्य शिविर से ही 17 फरवरी को अयोध्या के लिए रवानगी होगी। पहला पड़ाव प्रतापगढ़ होगा, यहां रात्रि विश्राम के बाद 18 फरवरी की सुबह राम मंदिर संकल्प के बारे में अपनी बात साझा करने के बाद यात्रा सुल्तानपुर के लिए रवाना होगी। यहां भी रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन 19 फरवरी को अयोध्या के लिए कूच किया जाएगा।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष भर के सत्याग्रहियों की सूची तैयार
इष्टिका (ईंट) शिला पूजन के लिए यदि 21 फरवरी को रोका जाता है तो दूसरे चार लोग जाएंगे, उन्हें भी गिरफ्तार किया जाता है तो अगले चार लोग शिलाएं लेकर जाएंगे। प्रत्येक प्रहर के अनुसार आठ प्रहर के लिए प्रतिनिधि के लिए 32 सत्याग्रहियों की सूची तैयार कर ली गई है। यह क्रम तब तक जारी रहेगा जब तक मंदिर बनाने के लिए राम जन्म भूमि हिंदुओं को सौंप नहीं दी जाती और उस पर मंदिर निर्माण आरंभ नहीं हो जाता है।
संकल्पपूर्ति को सवा लाख पार्थिव शिवलिंग
राम मंदिर निर्माण के संकल्प की पूर्ति के लिए बड़ा स्थान पर रसिक पीठाधीश्वर जनमेजय शरण जी की देखरेख में सरयू किनारे सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण किया जाएगा, जिसका शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की देखरेख में पूजन, अभिषेक के बाद विसर्जन किया जाएगा। इस दौरान राम नाम जप महायज्ञ भी जारी रहेगा