उनके भीतर सबको साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता है। इनके प्रयासों से किन्नर अखाड़ा को नई पहचान मिली है। किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा कि किन्नर समाज हमेशा से तिरस्कृत रहा है। इस समाज को किसी ने अपनाने की कोशिश नहीं की। न सम्मान मिला न ठिकाना, लेकिन जूना अखाड़े के महामंत्री महंत हरि गिरि और आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद ने इस समाज को संरक्षण प्रदान कर बड़ा संदेश दिया है।
शाही स्नान में किन्नर अखाड़े को शामिल किए जाने से पूरे देश ही नहीं, दुनिया भर में एक अलग संदेश गया है। इसके लिए किन्नर समाज जूना अखाड़े का हमेशा आभारी रहेगा। इस मौके पर किन्नर अखाड़े की उत्तर भारत की प्रभारी भवानी मां, महामंडलेश्वर पुष्पा माई, मयूरी, पवित्रा, कमल माई, कामिनी समेत कई पदाधिकारी मौजूद थीं। इससे पहले मिश्र बंधुओं ने भजनों की प्रस्तुति की।