अयोध्या मुद्दे पर सरकार की चुनौती बढ़ती ही जा रही है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के बाद शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने भी सरकार के पक्ष पर असहमति जताई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष अपना मत स्पष्ट करने के साथ उन्होंने विहिप की धर्म संसद से भी दूरी बनाए रखी है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद से मुलाकात की। स्वामी निश्चलानंद ने बताया कि मुख्यमंत्री उनके शिष्य हैं और मिलने आए थे।
मुख्यमंत्री ने राम मंदिर मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा। उनका कहना था कि यह प्रकरण न्यायालय में है और सरकार की सीमा होती है लेकिन, वह इससे सहमत नहीं थे। मुख्यमंत्री ने विहिप के धर्म संसद का भी आमंत्रण दिया लेकिन, निश्चलानंद ने अस्वीकार कर दिया।
शंकराचार्य का कहना था कि वह किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं। इसलिए धर्म संसद में जाने का सवाल नहीं है। निश्चलानंद का कहना था कि वह धर्म संसद में तो नहीं जाएंगे लेकिन, अयोध्या के मुद्दे पर अपना संदेश भिजवा दिया है। उनका कहना था कि मंदिर मुद्दे पर सभी पार्टियां एक जैसी हैं। कोई भी दल राम मंदिर निर्माण के प्रति गंभीर नहीं है। सभी दल अवसरवादी हैं।