इसके बाद वह मान गए। कुछ देर बाद वाराणसी के जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने भी उनसे यही अनुरोध किया तो बोले, हम देश के साथ हैं। यद्यपि श्रीरामजन्मभूमि के संदर्भ में लिया गया निर्णय सामयिक और आवश्यक है लेकिन देश में उत्पन्न आकस्मिक परिस्थितियों के मद्देनजर यात्रा को कुछ समय स्थगित करना जरूरी हो गया है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, आंदोलन इसलिए जरूरी है क्योंकि मौजूदा केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया है कि अधिग्रहित भूमि में से विवादित भूमि उनके मूल मालिकों को वापस की जाए ताकि मंदिर निर्माण आरंभ हो सके और उच्चतम न्यायालय ने केंद्र की इस अर्जी को मूल वाद से जोड़ दिया है । ऐसे में उस भूमि के सदा के लिए हिंदुओं के हाथ से निकल जाने का खतरा पैदा हो गया है, जहां रामलला विराजमान हैं। इसी तरह राम का पुतला बनाए जाने की योजना भी शास्त्रीय, सनातन धर्म और सनातनधर्मियों की भावना के विपरीत है।
बोले, आज कश्मीर की आतंकवादी गतिविधियों से देश में युद्ध जैसा वातावरण बन गया है । यह समय एकजुट होकर आतंकवादियों और उनके पीछे खड़े लोगों के विरुद्ध अपनी दृढ़ता का परिचय देने का है। हम देशवासियों की भावनाओं के साथ हैं। ऐसे समय में रामाग्रह यात्रा और शिलान्यास कार्यक्रम से राष्ट्र का ध्यान भटक सकता है । हम नहीं चाहेंगे कि हमारा कोई भी कार्यक्त्रस्म राष्ट्रहित में बाधा डाले। इसीलिए रामाग्रह यात्रा और शिलान्यास कार्यक्रम कुछ समय के लिए स्थगित है। नया मुहूर्त निकालकर भविष्य में कार्यक्रम को पूरा किया जाएगा।
रामलला के दर्शन कर घरों को लौट जाएं
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि जो लोग अभियान के लिए घरों से निकल कर प्रयाग पहुंच चुके हैं, वह संगम स्नान करके संभव हो तो अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन करते हुए अपने-अपने घरों को लौट जाएं।