भइया, तीन घंटे हो गए हमेें इधर से उधर घूमते हुए। जिस रास्ते पर जाओ, पुलिसवाले वापस कर दे रहे हैं। हम रिश्तेदारों से भी बिछड़ गए हैं। प्लीज हमें जाने दो। इतना सामान लेकर आखिर हम कैसे जाएंगे? लाउदर रोड चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मी से इतना कहते-कहते दिल्ली से आईं सुधा गुप्ता की आंखें भर आईं। पुलिसवाला भी उनकी हालत देख असहज हो गया। लेकिन ‘साहब’ के आदेश के आगे वह मजबूर था। आखिरकार भरी आंखें लेकर सुधा व उनके साथ ई रिक्शे पर सवार लोगों को वापस जाना पड़ा।
दिल्ली निवासी सुधा की तरह ही दूरदराज से आए सैकड़ों लोग रविवार को कुछ इसी तरह से अपना दर्द बयां करते नजर आए। जिस डायवर्जन व्यवस्था के बारे में पुलिस अफसर यह कहते नहीं थक रहे थे कि इससे श्रद्धालुओं का सफर सुविधाजनक होगा, वही व्यवस्था उनके लिए सिरदर्द का सबब बन गई। हालत यह रही कि गैरजनपद से आए श्रद्धालु बस व रेलवे स्टेशन से निकलने के बाद घंटों शहर में इधर से उधर घूमते रहे। पुलिस उन्हें एक रास्ते से दूसरे रास्ते पर भेजती रही और श्रद्धालु परेशान होते रहे। दिल्ली के शकरपुर से आईं सुधा व उनके परिचित भी इन्हीं में से थे।
उनके साथ आए शकरपुर निवासी नरेश जैन ने बताया कि एक बजे के करीब वह रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां पता चला कि शटल बस रोडवेज बस अड्डे के पास मिलेगी। ई रिक्शे से वह लोग बस अड्डे पहुंचे लेकिन काफी देर इंतजार करने के बाद भी बस नहीं मिली तो वह दूसरे ई रिक्शे से चल दिए। जगह-जगह बैरिकेडिंग की वजह से उन्हें पत्थर गिरिजाघर से होकर मेडिकल चौराहे तक जाना पड़ा जिसमें करीब घंटे भर का वक्त लग गया। लेकिन वहां पुलिसकर्मियों ने ई रिक्शे को वापस कर दिया।
चालक ई रिक्शा लेकर पन्ना लाल रोड से होते हुए लाउदर रोड चौराहे पर पहुंचा तो वहां से जार्जटाउन व मेडिकल कॉलेज जाने वाले रास्तों पर भी पैदल ही इंट्री थी। पुलिस ने फिर वापस किया तो सुधा व उनके साथ आए लोगों की आंखों में आंसू आ गए। इस संबंध में अफसरों को फोन मिलाया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
‘इत्थे फिर कबी नई अवेंगे’
कुछ इसी तरह का नजारा बालसन चौराहे पर देखने को मिला। जहां दूरदराज से आए श्रद्धालु सामान सड़क पर रखकर बैठे नजर आए। पंजाब के पटियाला जिले से आए रामगोपाल व उनका परिवार भी सामान लेकर सड़क किनारे बैठे रहे। पूछने पर बताया कि एक बजे शहर पहुंचे और तीन घंटे बाद भी मेला क्षेत्र तक नहीं पहुंच सके हैं। यहां तक आने के लिए ई रिक्शे वाले ने 700 रुपये लिए। अब यहां पुलिसवाले कह रहे हैं कि आगे जाना है तो पैदल ही जाओ। अब इतना सामान लेकर हम बुजुर्ग कैसे पैदल झूंसी तक जा सकेंगे। इसी बीच उनके साथी बोल पड़े कि ‘इत्थे फिर कबी नई अवेंगे’।
पेट्रोल लेने के लिए खरीदनी पड़ी बोतल
ऐसा नहीं है कि डायवर्जन व्यवस्था का शिकार सिर्फ दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु ही हुए। शहरियों की भी इस व्यवस्था ने जमकर फजीहत की। हालात यह रहे कि बालसन चौराहे पर स्थित पंप पर पेट्रोल लेने भी जा रहे वाहनचालकों को बैरंग वापस होना पड़ा। बैरियर लगाकर खड़े रहे पुलिसकर्मियों ने साफ कहा कि आगे जाना है तो पैदल ही जाना होगा। मजबूरी में लोगों को वाहन चौराहे के पास खड़ा करके बोतल में पेट्रोल लेने जाना पड़ा। दारागंज निवासी रंजना भी ऐसी ही परेशानी से जूझती नजर आईं। बताया कि चौराहे के पास स्थित दुकान से उन्हें पेट्रोल लेने के लिए 10 रुपये देकर खाली बोतल लेनी पड़ी।
हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे बाबा
कुंभ के लिए शहर आगमन का अनुभव अजमेर से आए कुछ संतों के लिए भी सुखद नहीं रहा। अजमेर से आए महंत गोपालदास लाउदर रोड चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मियों से हाथ जोड़कर गुहार लगाते
रहे लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। उन्होंने बताया कि चौराहे से कुछ दूर पर ही उनके परिचित का घर है जहां वाहन खड़ा कर वह व उनके साथियों को पैदल ही आगे जाना है। लेकिन पुलिसवाले वाहन आगे जाने देने के लिए राजी नहीं हुए।
mauni amavasya
झूंसी पुल पर भीड़ बढ़ने की वजह से बनारस जाने वाले श्रद्धालुओं को पुलिस ने सिविल लाइन बस स्टेशन भेजा। सिविल लाइन बस स्टेशन पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को बताया जा रहा है कि बस तो झूंसी से ही मिलनी है। अब श्रद्धालु परेशान होकर शोर शराबा कर रहे हैं।