अयोध्या में शीघ्र राम मंदिर निर्माण शुरू कराने को लेकर विश्व हिंदू परिषद की गुरुवार यानि आज शुरू हुई धर्मसंसद में बड़ा फैसला लिए जाने के आसार हैं। आरएसएस के सर संघचालक मोहन भागवत और विहिप के पदाधिकारियों के बीच बुधवार को बातचीत के बाद यह माना जा रहा है कि धर्मसंसद में ही राम मंदिर निर्माण की तारीख की घोषणा कर दी जाएगी।
बुधवार को पूर्व में तय कार्यक्रम से अचानक एक दिन पहले कुंभ नगरी पहुंचे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक मोहन भागवत और विहिप पदाधिकारियों के बीच हुई दो दौर की वार्ता के बाद यह निष्कर्ष निकला है। अब धर्म संसद में संतों की ओर से राम मंदिर निर्माण की तारीख तय करवाई जा सकती है।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कुंभ नगर स्थित शिविर में बृहस्पतिवार से दो दिवसीय धर्म संसद की शुरुआत हो रही है। धर्म संसद में सरसंघचालक मोहन भागवत का 31 जनवरी को आने का कार्यक्रम तय था। तय कार्यक्रम से अचानक एक दिन पहले ही सरसंघचालक कुंभ नगरी पहुंच गए। उनके आगमन की जानकारी मिलते ही विहिप के भी कई बड़े पदाधिकारी शिविर पहुंच गए। भागवत का आगमन बेहद गोपनीय रखा गया। उनके विहिप के शिविर में पहुंचने पर सबसे पहले शाखा लगाई गई।
उसके बाद भागवत ने दोपहर में आरएसएस और विहिप पदाधिकारियों के साथ धर्म संसद के संबंध में बैठक की। इसके बाद देर शाम एक बार फिर कोर कमेटी की बैठक का दौर चला। दोनों बैठकों का निष्कर्ष यही रहा कि राम मंदिर निर्माण पर जनभावनाओं को देखते हुए अब इसकी तारीख तय करने में देरी न की जाए। मंदिर निर्माण की तारीख घोषित करने का यही बेहतर समय है। धर्म संसद में विचार-विमर्श के बाद संतों से मंदिर निर्माण की तारीख घोषित कराने पर सहमति बन गई है।
कई बड़े संघ पदाधिकारी थे सक्रिय
सरसंघचालक के आगमन से पहले ही संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी प्रयागराज में मौजूद थे। यह पदाधिकारी धर्म संसद को लेकर संत समाज और आम जनमानस की भावनाओं को समझ रहे थे। बुधवार को बैठक में इन पदाधिकारियों ने अपने निष्कर्षों से सरसंघचालक को अवगत कराया। राम मंदिर निर्माण की तारीख तय करने पर सहमति बनी। इसके बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने का कार्यक्रम तय हुआ है।
संत समाज के दिलाएंगे भरोसा
विहिप की धर्म संसद को कई संतों ने व्यर्थ की कवायद बताया है। संतों को धर्म संसद में आने का न्योता देने पहुंचे विहिप के पदाधिकारियों से कई संतों ने कोी नतीजा न निकलने की बात कही थी। धर्म संसद में सरसंघचालक के साथ ही मुख्यमंत्री की मौजूदगी को संत समाज को भरोसा दिलाने की कोशिश मानी जा रही है। मुख्यमंत्री धर्म संसद से पहले एक-दो संतों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर सकते हैं।