राम नाम से दूर होती है अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा - राम नाम का जप करने से और लाल रंग की स्याही से श्रीराम का नाम लिखने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैैं जिससे शनि, राहु, केतु, अशुभ ग्रहों के असहनीय प्रकोपोें से राहत मिलती है। श्री राम का नाम लेने अथवा लिखने मेें इतनी शक्ति होती है कि मुश्किल से मुश्किल लगने वाले काम सरलतापूर्वक सम्पन्न हो जाते हैैं।
आनन्द रामायणम के अनुसार राम नाम जप की अपेक्षा सौ गुना अधिक पुण्य ”राम नाम“ लिखने मेें है। राम नाम लाल रंग की स्याही से लिखने से मन एकाग्र होता है तथा स्मरण शक्ति की वृद्धि होती है। संसार में ‘राम’ नाम से बढ़कर कुछ भी नहीं है, ‘रा’ उच्चारण करने से सब पाप बाहर निकल जाते हैं। ‘म’ के उच्चारण से कपाट बंद हो जाते हैं, जिससे पाप फिर नहीं आ सकता।
पत्थर पर राम का नाम लिखकर समुद्र के पानी में फेंक देने से जब पत्थर तैरने लग गया तो भला जो मानव राम का नाम हृदय में बसा लेगा, वह तो भवसागर से निश्चित ही तर जाएगा। हारी बीमारी में जैसे जमा धन काम आता है वैसे ही मुसीबत पड़ने पर राम धन काम आता है। ”राम नाम कलि अभिमत दाता“ अर्थात् इस घोर कलियुग में केवल राम नाम समस्त मनोरथ पूर्ण करने वाला है।
श्रीराम नाम लेखन इस युग में भक्त की समस्त इच्छाऐं पूरी करता है। जब कलियुग में श्रीराम नाम ही तारक है तब क्यों न इस पवित्र नाम का सहारा लेकर जीवन को सुखमय बनाया जाए। श्री राम के नाम का लेखन करने से हाथ पवित्र होते हैं और जब आप श्रीराम नाम का उच्चारण करते हैं तब जिह्ना पवित्र होती है। इसके पश्चात श्रीराम नाम लिखने से अंर्तात्मा में श्रीराम का तेज जाग्रत होने लगता है।
बुरे समय में दान-पुण्य तथा राम का नाम ही काम आता है- धर्म अनुसार हर व्यक्ति को अपनी कमाई का कुछ न कुछ भाग धार्मिक कार्यों, मानव सेवा, सार्वजनिक कार्यों अथवा गरीब याचकों की सहायता के रूप में अवश्य खर्च करना चाहिए। कहते हैं मानव के आड़े वक्त (बुरे समय में) में उसका यह किया गया दान-पुण्य ही काम आता है।
कभी-कभी दुर्घटना से भी आदमी बच जाता है तो घर की गृहणियां कहती हैं कि न जाने कौन-सा पुण्य कर्म किया जो दुर्घटना से बच गए। भगवान राम का नाम स्वयं लिखना और दूसरों से लिखवाने के लिए प्रेरित करने वाले की प्रभु चोट-चपेट, दुर्घटना आदि से रक्षा करते हैैं। संकट क्या होता है, यह सच्चे राम भक्त जानते ही नहीं! ऐसा भी देखा गया है कि कभी-कभी व्यक्ति को अचानक से ऐसी उपलब्धि हासिल हो जाती है जिसके बारे में न तो उसने कभी सोचा होता है और न ही वह उसके काबिल होता है। उससे भी ज्यादा योग्य व्यक्ति उस उपलब्धि अथवा पुरस्कार से वंचित रह जाते हैं। उसको यह उपलब्धि राम नाम के पुण्य प्रताप से ही प्राप्त होती है।