एक के बाद एक करके उन्होंने पांच सफाईकर्मियों के पांव पछारे और पोछे और इस दौरान पंडाल में मौजूद हजारों कर्मचारी लगातार तालियों से इस पल का स्वागत करते रहे। किसी की जुंबा पर भगवान कृष्ण और सुदामा रहे तो कोई भगवान राम और केवट से इसकी तुलना कर रहा था। इस सम्मान का हकदार बने प्यारे लाल, ज्योति, चौबी, होरीलाल और नरेश कुमार तो जैसे मूर्ति बन गए थे। दिल और दिमाग पर भावनाएं इस कदर हावी रहीं कि वे कुर्सी पर झुककर भी प्रधानमंत्री का अभिवादन नहीं कर पा रहे थे, बस नजरें झुंकी रहीं। आखिर ऐसा हो भी क्यों न। अभी तक उन्होंने सर्फाई के लिए उलाहना ही सुना था और आज स्वयं प्रधानमंत्री उनके पैर धो रहे हैं।
पांचों सफाई कर्मचारियों का कहना था, ‘ऐसा सम्मान, अब का चाही। यह पूरे जीवन का पूंजी है।’ प्रधानमंत्री ने भी उन्हें इस सम्मान का असली हकदार बताते हुए खुद के लिए अविस्मरणीय पल बताया। उन्होंने कहा, ‘जिन भाई-बहनों की धूल की वंदना की वह मेरे साथ जीवन भर रहने वाला है।’इसके बाद प्रधानमंत्री पांच अन्य सफाई कर्मचारियों तथा दो स्वच्छाग्रहियों को अपने हाथों से सम्मानित कर कुंभ में लगे करीब 20 हजार से सफाईकर्मियों को पुरस्कृत किया। प्रधानमंत्री ने नाविकों, सुरक्षा में लगे जवानों को भी सम्मानित किया तथा उन्हें बीमा, स्वास्थ्य और शिक्षा का सौगात दिया।
स्वच्छता सेवा सम्मान कोष में 51 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री ने कुंभ में लगे सफाई एवं पुलिस कर्मियों, स्वच्छाग्रहियों तथा नाविकों को योजनाओं की सौगात की। इसके लिए स्वच्छ सेवा सम्मान कोष का गठन किया गया है। इस फंड के लिए 51 करोड़ रु़पये स्वीकृत किए गए हैं। प्रधानमंत्री ज्योति बीमा, प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना, आयुष्मान, श्रम तथा बालिकाओं की शादी और शिक्षा से संबंधित योजनाओं का लाभ देने की घोषणा की। लाभार्थी के अंश की पूरी राशि तथा अन्य लाभ इसी फंड से दिए जाएंगे। इसकी घोषणा के बाद प्रधानमंत्री ने सफाईकर्मियों, स्वच्छाग्रहियों, सुरक्षाकर्मियों और नाविकों का कुंभ और देश निर्माण में योगदान बताते हुए उनसे सीधा रिश्ता कायम किया।