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कुंभ मेले में कम भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने उठाया ये कदम, अब संगम पहुंचने में नहीं होगी परेशानी

Sat, 26 Jan 2019 02:38 PM IST
shubham न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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संगम स्नान तथा कुंभ मेला भ्रमण के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अब पैदल नहीं चलना पड़ेगा। निजी वाहनों से संगम नोज तक जाया जा सकता है। प्रशासन ने मेला क्षेत्र में सामान्य वाहनों के प्रवेश पर से प्रतिबंध हटा लिया है। शुक्रवार को हुई बैठक में कुंभ मेलाधिकारी ने इसकी घोषणा की। हालांकि मुख्य स्नान पर्वों तथा इसके एक दिन पहले और बाद में वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा।

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कुंभ में इस बार 12 से 15 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद की जा रही है। मेला प्रशासन की ओर से मकर संक्रांति तथा पौष पूर्मिणा पर एक करोड़ से अधिक लोगों के स्नान की घोषणा की गई। हालांकि प्रशासन के इन आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं। सामान्य दिनों में भी मेला क्षेत्र में अपेक्षित भीड़ नहीं हो रही। इसके पीछे हर स्तर पर वाहनों के प्रवेश पर रोक है तो लोगों में भी भ्रम है कि उनके वाहन कहीं भी रोके जा सकते हैं। मगर अब प्रशासन की ओर से ढील देने के साथ लोगों का यह भ्रम दूर करने की कवायद भी शुरू की गई है। 

कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन ने बताया कि  मेला क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं है। लोग अपने वाहन से निर्धारित मार्ग से होते हुए संगम नोज समेत अन्य स्थलों पर जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मेला क्षेत्र में 10 शटल बसें भी चलाई जा रही हैं। लोग अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों में खड़ी करके इनकी मदद से मेला में कहीं जा सकते हैं।
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यह सेवाएं पूरी तरह से मुफ्त हैं। इसके अलावा मेला क्षेत्र में ई-रिक्शा भी चलाए जा रहे हैं। उन्होंने शहरियों तथा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से मेला भ्रमण की अपील की है। उन्होंने संस्कृति एवं कला ग्राम आदि स्थलों के भ्रमण की भी अपील की है। कुंभ मेलाधिकारी ने शुक्रवार को मंडलायुक्त डॉ.आशीष कुमार गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इसकी जानकारी दी।

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संस्कृति, कला ग्राम से दूर ही हैं श्रद्धालु

साधु-संतों और अखाड़ों के बाद कुंभ आयोजन के मुख्य आकर्षणों में शामिल संस्कृति एवं कला ग्राम आम श्रद्धालुओं से दूर हैं। संगम तथा मेला के मुख्य क्षेत्र से काफी दूर होने की वजह से स्नान तथा भ्रमण के लिए आने वाले लोग वहां तक पहुंच ही नहीं पा रहे। ऐसे में संस्कृति, ऐतिहासिकता, सभ्यताओं की जानकारी के लिहाज से महत्वपूर्ण इन प्रदर्शनियों तक क्षेत्रीय लोग ही पहुंच पा रहे हैं।

संस्कृति एवं कला ग्राम की स्थापना अरैल स्थित सेक्टर 20 में की गई है। कला ग्राम में हड़प्पा, वैदिक, रामराज्य, कृष्ण लीला, स्वतंत्रता आंदोलन समेत अनेक काल को प्रतिमाओं के माध्यम से प्रभावी एवं आकर्षक ढंग से दिखाया गया है। संस्कृति ग्राम, संस्कृति कुंभ में अलग-अलग राज्यों की संस्कृति, कलाकृतियां, हस्तशिल्प आदि की प्रदर्शनी लगाई गई है।

वहां सैकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियों तथा अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों को देखा जा सकता है। इसके अलावा विविध सांस्कृतिक आयोजन भी होते रहते हैं। इन्हें देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं लेकिन अपेक्षा से काफी कम संख्या है। इसकी मुख्य वजह मुख्य मेला क्षेत्र से इसकी दूरी है। यह स्थान संगम, अखाड़ों, कल्पवासियों के शिविर से काफी दूर हैं। इसके अलावा वहां तक जाने के लिए साधन भी नहीं है। ऐसे में मेला में आने वाले लोग वहां तक नहीं  पहुंच पा रहे।
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