देश और दुनिया के दूसरे देशों कुंभ क्षेत्र में आकर अपना सब कुछ लुटाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी कम नहीं है। गृहस्थ जीवन को त्यागकर संन्यासी बनने वाले हजारों लोग यहां अपना पिंडदान भी कर जाते हैं। इन सबके पीछे गुरु की तरफ संन्यासियों के कानों में बोला गया महावाक्य है, जो संंन्यासी बनने के बाद के जीवन का मूलमंत्र हो जाता है। इस महावाक्य को अखाड़ों की परंपरा में पेस मंत्र कहा जाता है।