नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी
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तीर्थराज प्रयाग में अर्धकुंभ और कुंभ का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने राज्य सरकार की ओर से अर्धकुंभ को कुंभ की संज्ञा दिए जाने पर विरोध जताया है। चौधरी ने पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ समेत कई प्रमुख संतों को पत्र लिखा है।
नेता प्रतिपक्ष ने चार पेज के अपने पत्र में लिखा है कि पौराणिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष तीर्थराज प्रयाग में अर्धकुंभ का आयोजन है। लेकिन प्रदेश की योगी सरकार ने इन सभी तथ्यों और ग्रहों-नक्षत्रों के योग को नकारते हुए जबरदस्ती इसे पूर्ण कुंभ की संज्ञा दी है।
प्रयाग के अलावा हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में भी हर 12वें वर्ष कुंभ आयोजित होता है। प्रयागराज में हर साल माघ मेला और हर छठे साल अर्धकुंभ की परंपरा है। प्रदेश सरकार के मुखिया एक संत हैं। उनकी सरकार अर्धकुंभ को कुंभ करने का विधेयक विधानसभा में लायी थी, जिसका विपक्षियों ने विरोध किया था।
फिर भी सरकार ने अपने बहुमत के अहंकार में इसे पारित करा लिया। संतों और महात्माओं से अपील है कि वे अर्धकुंभ व कुंभ की आदि काल से चली आ रही परंपरा को जीवंत रखें। चौधरी ने सरकार से पूछा है कि प्रदेश सरकार छह साल में ही कुंभ कर रही है तो क्या हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में भी छह वर्ष में कुंभ मनाया जाएगा।
प्रयागराज में अर्धकुंभ है
इस संबंध में शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने बताया कि राम गोविंद चौधरी का पत्र उन्हें मिला है। राज्य सरकार ने अर्धकुंभ को कुंभ की संज्ञा भले दी है। लेकिन अधिकतर श्रद्धालु और संत इसे अर्धकुंभ के रूप में ही ले रहे हैं। वर्ष 2013 में प्रयाग में कुंभ हुआ था। गणना के अनुसार यहां का अगला कुंभ अब 2025 में होगा।