सबसे ज्यादा हलचल रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य के शिविर में देखी गई। विहिप पदाधिकारियों के अलावा अखाड़ों से जुड़े तमाम संतों ने उनसे संपर्क कर आगे क्या करना है, इसे लेकर उनकी राय पूछी है। पता चला है कि हंसदेवाचार्य ने अखाड़ों के कई संतों पर नाराजगी जाहिर की है, जिन्होंने विहिप की धर्म संसद का बहिष्कार किया है।
इस संबंध में जब हंसदेवाचार्य से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कुछ लोगों की दिशा भ्रमित हो गई है। बोले कि ऐसे लोगों को समझना होगा कि सिर्फ राम मंदिर निर्माण ही नहीं चीन और पाकिस्तान को जवाब देने के लिए भी केंद्र में मोदी सरकार की वापसी जरूरी है। सपा-बसपा के गठबंधन को उन्होंने ठगबंधन की संज्ञा देते हुए कहा कि ऐसे लोगों के भरोसे देश को नहीं छोड़ा जा सकता है। जो इनके पीछे लगे हैं, उन्हें देश और राम की चिंता नहीं है।
इसी तरह शंकराचार्य अधोक्षजानंद के शिविर में भी भाजपा के कई प्रमुख नेताओं का आना जाना शुरू हो गया है। केंद्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया के बाद गुवाहाटी की भाजपा सांसद विजया चक्रवर्ती, अरुणाचल सरकार के मंत्री जापूडेरा ने अलग-अलग समय पर आकर आगामी सरकार को लेकर मंथन किया। अधोक्षजानंद ने कहा कि पहली बार कुंभ में एक सार्थक पहल हो रही है।