राम मंदिर मुद्दे पर शुरू सियासी गठजोड़ और घमासान के बीच विश्व हिंदू परिषद के धर्म संसद में एक बार फिर भाजपा के लिए 2019 की स्क्रिप्ट तैयार की गई। धर्म संसद में विरोधी एका को लेकर चिंता साफ दिखी और इसके खिलाफ हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए नाराज संतों को भी जोड़ने की कवायद हुई। धर्म संसद में नरेंद्र मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाली हर कदम को पीछे खिंचने की रणनीति पर अमल हुआ।
इस कवायद में विहिप नेताओं तथा संतों ने मंदिर मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री के मन की बात सुनी और पूरे प्रकरण को चुनाव तक टाल दिया गया।धर्म संसद में हर वक्ता ने केंद्र में दोबारा भाजपा सरकार बनाने की बात की। राम मंदिर निर्माण में देरी को लेकर नाराज संतों को विकल्प न होने का एहसास कराया गया तो अयोध्या कूच की घोषणा करने वालों को सियासी षड्यंत्र करार दिया गया।
विपक्षी एकता से चिंतित भाजपा तथा आरएसएस को साफ दिखने लगा है कि हिंदुत्व, राष्ट्रीय और विकास के एजेंडे को आगे लेकर ही बढ़ना होगा। इसलिए धर्म संसद में इन सभी बिंदुओं को प्रमुखता से उठाया गया। मंदिर निर्माण में देरी को लेकर शुरू सियासत की काट निकालने की पटकथा पखवारे भर पहले ही लिख दी गई थी और गैरविवादित जमीन को लेने की रणनीति बनाई गई।