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कुंभ 2019ः धर्म संसद से भाजपा की 2019 की राह आसान करने की कवायद, मंदिर मुद्दे पर भी ‘मन की बात’

Sat, 02 Feb 2019 02:57 PM IST
kapil kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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राम मंदिर मुद्दे पर शुरू सियासी गठजोड़ और घमासान के बीच विश्व हिंदू परिषद के धर्म संसद में एक बार फिर भाजपा के लिए 2019 की स्क्रिप्ट तैयार की गई। धर्म संसद में विरोधी एका को लेकर चिंता साफ दिखी और इसके खिलाफ हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए नाराज संतों को भी जोड़ने की कवायद हुई। धर्म संसद में नरेंद्र मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाली हर कदम को पीछे खिंचने की रणनीति पर अमल हुआ।

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इस कवायद में विहिप नेताओं तथा संतों ने मंदिर मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री के मन की बात सुनी और पूरे प्रकरण को चुनाव तक टाल दिया गया।धर्म संसद में हर वक्ता ने केंद्र में दोबारा भाजपा सरकार बनाने की बात की। राम मंदिर निर्माण में देरी को लेकर नाराज संतों को विकल्प न होने का एहसास कराया गया तो अयोध्या कूच की घोषणा करने वालों को सियासी षड्यंत्र करार दिया गया।

विपक्षी एकता से चिंतित भाजपा तथा आरएसएस को साफ दिखने लगा है कि हिंदुत्व, राष्ट्रीय और विकास के एजेंडे को आगे लेकर ही बढ़ना होगा। इसलिए धर्म संसद में इन सभी बिंदुओं को प्रमुखता से उठाया गया। मंदिर निर्माण में देरी को लेकर शुरू सियासत की काट निकालने की पटकथा पखवारे भर पहले ही लिख दी गई थी और गैरविवादित जमीन को लेने की रणनीति बनाई गई।

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धर्म संसद के माध्यम से मोहन भागवत ने संतों के सामने आरएसएस का मत स्पष्ट किया

विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री से गैर विवादित भूमि संबंधित पक्षों को सौंपने की मांग की गई थी और 15 दिन के भीतर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाल दी। अब मामला न्यायालय में है।

धर्म संसद के माध्यम से मोहन भागवत ने भी संतों के सामने आरएसएस का मत स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आने वाले चार छह महीने निर्णायक हैं। इसमें ऐसा कोई काम नहीं करना है जो सरकार के लिए मुश्किल खड़ी करे। संतों ने नोटबंदी के फैसले को उचित ठहराया तो योग, विदेशों में भारत की बढ़ती साख आदि बिंदुओं को उठाकर राष्ट्रवाद के नाम पर मोदी सरकार की जमीन तैयार करने की कोशिश की।

धर्म संसद में संतों ने जेएनयू में राष्ट्र विरोधी नारा, आतंकवादी के लिए रात में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने, जुलूस निकालने आदि मुद्दों को उठाकर वामपंथी संगठनों, कांग्रेस आदि दलों को घेरा। वहीं सपा और बसपा गठबंधन को अवसरवादी करार दिया। इन बिंदुओं को प्रस्ताव में शामिल कर धर्म संसद ने आगामी लोकसभा चुनाव में हिंदुवादी संगठनों की दिशा भी तय की और इसी के साथ भाजपा सरकार के समर्थन की अपील की।
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