पायलट बाबा का जन्म बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में एक राजपूत परिवार में हुआ था। इनका पुराना नाम कपिल सिंह था। बाबा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उनका भारतीय वायु सेना में चयन हुआ। बाबा यहां विंग कमांडर के पद पर थे। बाबा 1962, 1965 और 1971 की लड़ाइयों में सेवा दे चुके हैं। इसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया।
बाबा बताते हैं कि, सन 1996 में जब वे मिग विमान भारत के पूर्वोत्तर में उड़ा रहे थे तब उनके साथ एक हादसा हुआ था। उनका विमान से नियंत्रण खो गया। उसी दौरान बाबा को उनके गुरु हरि गिरी महाराज का दर्शन प्राप्त हुए और वे उन्हें वहां से सुरक्षित निकाल लिए। यही वो क्षण था जब बाबा को वैराग्य प्राप्त हुआ और वे सेना की लड़ाई से दूर शांति और अध्यात्म की तरफ प्रवृत्त हो गए।
संन्यास लेने से पहले बाबा कुछ दिन तक बॉलीवुड से भी जुड़े रहे हैं, उन्होंने 'एक फूल दो माली' में अभिनय भी किया है। बाबाजी के अनुसार वे बॉलीवुड की कई नामचीन हस्तियों के साथ काम कर चुके हैं। बॉलीवुड की जानी-मानी अभीनेत्री मनीषा कोइराला के आध्यात्मिक गुरु बाबाजी ही हैं।
बाबा के आश्रम में ज्यादातर विदेशी भक्त रहते हैं। बाबा का दावा है कि भारत में ही नहीं विदेशों में भी उनके भक्त हैं और इस आस्था के कुंभ में लगभग 2000 विदेशी भक्त आएंगे। फिलहाल 250 से ज्यादा विदेशी भक्त उनके कैम्प में आ चुके हैं।
पायलट बाबा बताते हैं कि, उन्होंने 16 साल तक हिमालय की नन्दा देवी घाटी में तपस्या, ध्यान व योग किया। 100 से भी अधिक बार वे समाधि ले चुके हैं, इसमें सबसे लम्बी समाधि 30 दिनों की थी। बाबा कहते हैं कि वे 9 दिन तक जल समाधि भी ले चुके हैं और एक दिन तक ऑक्सिजन रहित कमरे में रहे हैं। बाबाजी कहते हैं कि ध्यान से बड़ी साधना इस दुनिया में कुछ नहीं है। ध्यान आपको खुद के अंदर छिपी तमाम शक्तियों से रूबरू कराता है, ध्यान सत्य से आपका साक्षात्कार करवाता है।