बूढ़ी आंखे, मासूम चेहरे जब अपनों से मिले तो खुशी से आखें भर आईं और भाव से ओत-प्रोत लिपट कर रोने लगे। मानों लगा के एक पल का बिछुडऩा जैसे कई वर्षो का है। संगम माटी पर मौनी अमावस्या के दिन ऐसा ही हृदय विदारक रूदन और मिलन समागम भूल-भुलैया शिविरों में देखने को मिला। जहां पर सोनभद्र के राम रखी सहित कईयों के बिछड़े परिजनों का ऐसा हाल रहा। यहां मिलने-मिलाने क्रम देर-रात चलता रहा।
मौनी अमावस्या के दिन सुबह से आस्था सैलाब उमड़ पड़ा। संगम घाट पर सुबह से स्नान-ध्यान का क्रम प्रारंभ हो गया था। लोग गंगा मैया के जयकारे लगाकर आस्था की डूबकी लगा रहे थे। घाट पर भारी भीड़ के चलते दूर-दराज से आने वाले बच्चे, बूढ़े-बूढ़ी और महिलाएं घबराने लगी। इसके चलते जल्दी जाने के चक्कर में एक दूसरे का साथ छूटने लगा। हड़बराहट में लोग बिछुडऩे लगे। घाट पर चीख पुकार उठने लगी।
इनकी घबराहट को दूर करने के पुलिस वालों ने मदद की। नहीं मिलने पर इन्हें सीधे सेक्टर चार पहुंचा दिया गया। जहां लापता लोगों की पर्ची बनाकर लगातार एनाउंस किया जाने लगा। जिसे लोग सुनकर आने लगे और अपने साथ अपने घरों की ओर लौट गये। सोनभद्र जिले के रहने वाले राम रखी ने बताया कि मौनी अमावस्या के पर्व पर अपने साथी के साथ स्नान किया। भीड़-भाड़ में अचानक खो गये। वे पुलिस वालों से मदद से भूल-भुलैया शिविर छोड़ दिया। जहां साथी के नाम एनाउंस होने के चार घंटे बाद मुलाकात हुई।
खोया-पाया केंद्रों पर हजारों की संख्या पार
मौनी अमावस्या के दिन खोया-पाया में लापता वालों की संख्या हजार के पार हो गई। सेक्टर चार में प्रशासनिक भूले-भटके शिविर और हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति शिविर में पर्व के दिन करीब दस हजार से अधिक लोगों की पर्चिया बनाई गई। इसमें अधिकतर लोगों का मिलाया गया। इसमें बूढ़े पुरुष और महिलाएं के अलावां बच्चे शामिल रहे। संस्था के मैनेजर संत प्रसाद पांडेय ने बताया कि जिनके परिजन यहां आते हैं उन्हें सौंप दिया जाता है। जिनके नहीं आते हैं, उन्हें संस्था की ओर से साधन के जरिए घर भेज दिया जाता है। जहां तक बच्चों की बात है तो कुछ देर प्रतीक्षा के बाद चाइल्ड लाइन को सोैंप दिया जाता है।