फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुंभ 2019: पुण्य की आस, मुश्किलें अपार, पैदल चलने से परेशान रहे श्रद्धालु

Sat, 09 Feb 2019 10:08 PM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
kumbh 2019
विज्ञापन

धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक संस्कृतियों के कुंभ में आस्था हिलोरें मार रही है। तीसरे शाही स्नान वसंत पंचमी पर पुण्य कामना से संगम नगरी आए श्रद्धालु आयोजन की भव्यता से चकाचौंध हैं, लेकिन व्यवस्थागत दिक्कतों से वीआईपी कल्चर को कोस रहे हैं। कई किलोमीटर पैदल चलने वालों की मुश्किलें अपार हैं। महिलाओं और दिव्यांगों के लिए अलग से परिवहन व्यवस्था न किए जाने से दूर-दूर से आए श्रद्धालु परेशान रहे। तमाम मुश्किलों की बाधाएं पार करते हुए संगम तट पर पहुंचे श्रद्धालु गंगा मइय्या की जय बोल डुबकी लगाते रहे।

विज्ञापन


दिव्यांगों के लिए नहीं कोई व्यवस्था
हमीरपुर से गोरखपुर के रास्ते कुंभ क्षेत्र पहुंचे 65 वर्षीय दिव्यांग कृष्ण कुमार पांडेय संगम नोज पर व्यवस्था से खासे नाराज दिखे। वह बोले, ऐसा आयोजन किस काम का, जहां अपंगों को भटकना पड़े। उन्होंने बताया कि चलने फिरने में असमर्थ हैं। गीता वाटिका से साथ आए आठ लोगों ने सहारा दिया। तब 500 रुपये खर्च कर रिक्शा किया, जिसे पुलिस वालों ने बाहर ही रोक दिया। पैरों में सूजन आ गई है, कैसे डुबकी लगाएंगे, समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने बताया कि सारे यात्री निवास घूम चुके हैं, कहीं जगह नहीं मिली। अब रात में सिर छिपाने और भोजन की भी व्यवस्था का संकट है, खुले में रहना मजबूरी होगी।

पैदल चलना हुआ कष्टकारी
बिहार के मधबनी से आए 74 वर्षीय जयशंकर मिश्र ने बताया कि मेले में कॉरपोरेट कल्चर हावी है। आम लोगों की किसी की परवाह नहीं है। दिन भर से प्रशासन और पुलिस ने जगह-जगह रोकटोक की, वह किसी तरह 20 किलोमीटर का चक्कर काटकर कुंभ क्षेत्र पहुंचे हैं। सड़क किनारे बैठे बुजुर्ग कहीं ठौर न मिलने से व्यथित दिखे। वह बोले, कामना थी संगम स्नान की, इसलिए चले आए। मालूम होता इतनी परेशानी होगी तो शायद अभी न आते।

विज्ञापन

बेवजह रोकटोक है मनमानी

बिहार के मधुबनी से ही आए 76 वर्षीय गंगा ठाकुर कुंभ क्षेत्र में पहुंचने को ही सौभाग्य बताते हैं। उन्होंने कहाकि घर-परिवार की कुशलता और पुण्य कामना से डुबकी लगाने आए हैं। लोगों को अनावश्यक परेशान करने के लिए घुमाया जा रहा है। वह रुंधे गले से बोले, धूमते-फिरते थक गए हैं, अब गंगा मइय्या की शरण में है, वह पुण्य दिलाएंगी तभी डुबकी लगा पाएंगे। रात खुले आसमान के नीचे ही बितानी पड़ेगी। व्यवस्थाओं को उन्होंने दुरुस्त बताया लेकिन जगह-जगह रोकटोक को मनमानी करार दिया। उन्होंने कहाकि आम लोगों को रोका जा रहा है, लेकिन संपन्न लोगों के लिए नियम कानून ताक पर रख दिए गए हैं। 

भगवान के प्रति आस्था कुंभ लाई
श्रद्धालुओं की भीड़ में सुल्तानपुर के 66 वर्षीय महानारायण पिछले कई दिनों से मेला क्षेत्र में हैं। पत्नी के साथ आए महानारायण कुंभ की भव्यता से प्रभावित दिखे। वह बोले, जनम-जनम रति राम दर्द, यह वरदान न आन, अर्थ, धर्म, गति नहीं, मुक्ति...जनम-जनम... उन्होंने कहा कि तमाम परेशानियों के बाद भी इच्छा कोई नहीं बस भगवान के प्रति आस्था है। उन्होंने कुंभ की व्यवस्थाओं को सराहा।

परिवार के लिए गंगा मइय्या से मांगा आशीष
सुल्तानपुर की ही 64 वर्षीय गायत्री झा ने बताया कि कुंभ में संगम स्नान की इच्छा थी, पूरी हुई। मौनी से वसंत पंचमी तक हर दिन दो बार गंगा-यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी में डुबकी लगा रही हूं। कामना है कि परिवार-बच्चे सुखी रहें, गंगा मइय्या सबके संकट हरैं। वह बोलीं कि आम दिनों में तो नहीं लेकिन पर्व पर जगह-जगह रोके जाने से घूमना पड़ता है। इस परेशानी के बीच में पुण्य कामना से स्नान हो जाए तो सौभाग्य समझिए। 
विज्ञापन

कुंभ पुलिस ने किया प्रभावित

कुंभ मेला की भव्यता का प्रचार दिल्ली से दो बहनों को प्रयागराज तक खींच लाया। संगम नोज पर पैदल चलकर हांफते हुए पहुंची ७० वर्षीय मंजू चौधरी ने मेला पुलिस की खुले दिल से प्रशंसा की, वह बोलीं, पुलिस वालों का व्यवहार परेशानी और थकान को भुलाने वाला रहा। यहां जगन्नाथधाम के शिविर में रुकीं मंजू ने बताया कि बुजुर्गों के लिए मेला प्रशासन अलग से व्यवस्था करता तो भव्यता और बढ़ जाती। उन्होंने कहा कि यहां आकर मन खुश हो गया।

कुंभ की भव्यता खींच लाई प्रयागराज
दिल्ली से ही आईं आशा माथुर (73) भी कुंभ आयोजन को अद्भुत बताया। उन्होंने कहा कि पुण्य कमाने आए हैं, लेकिन पैदल चलने से बीमारों जैसी हालत हो गई है। उन्होंने कहाकि हर तरफ भक्ति का महौल पर वाहन वालों पर प्रशासन का अंकुश नहीं है। ई रिक्शा वाले जरा सी दूर चलने के लिए बुकिंग कराने को कहते हैं और तीन सौ रुपये मांगते हैं। मोलभाव करने पर वह आगे बढ़ जाते हैं। उन्होंने भी कुंभ आयोजन की भव्यता को सराहते हुए कहा कि जहां रोकटोक हो, वहां बुजुर्गों के लिए वाहन की व्यवस्था होनी ही चाहिए। 

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें