बिहार के मधुबनी से ही आए 76 वर्षीय गंगा ठाकुर कुंभ क्षेत्र में पहुंचने को ही सौभाग्य बताते हैं। उन्होंने कहाकि घर-परिवार की कुशलता और पुण्य कामना से डुबकी लगाने आए हैं। लोगों को अनावश्यक परेशान करने के लिए घुमाया जा रहा है। वह रुंधे गले से बोले, धूमते-फिरते थक गए हैं, अब गंगा मइय्या की शरण में है, वह पुण्य दिलाएंगी तभी डुबकी लगा पाएंगे। रात खुले आसमान के नीचे ही बितानी पड़ेगी। व्यवस्थाओं को उन्होंने दुरुस्त बताया लेकिन जगह-जगह रोकटोक को मनमानी करार दिया। उन्होंने कहाकि आम लोगों को रोका जा रहा है, लेकिन संपन्न लोगों के लिए नियम कानून ताक पर रख दिए गए हैं।
भगवान के प्रति आस्था कुंभ लाई
श्रद्धालुओं की भीड़ में सुल्तानपुर के 66 वर्षीय महानारायण पिछले कई दिनों से मेला क्षेत्र में हैं। पत्नी के साथ आए महानारायण कुंभ की भव्यता से प्रभावित दिखे। वह बोले, जनम-जनम रति राम दर्द, यह वरदान न आन, अर्थ, धर्म, गति नहीं, मुक्ति...जनम-जनम... उन्होंने कहा कि तमाम परेशानियों के बाद भी इच्छा कोई नहीं बस भगवान के प्रति आस्था है। उन्होंने कुंभ की व्यवस्थाओं को सराहा।
परिवार के लिए गंगा मइय्या से मांगा आशीष
सुल्तानपुर की ही 64 वर्षीय गायत्री झा ने बताया कि कुंभ में संगम स्नान की इच्छा थी, पूरी हुई। मौनी से वसंत पंचमी तक हर दिन दो बार गंगा-यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी में डुबकी लगा रही हूं। कामना है कि परिवार-बच्चे सुखी रहें, गंगा मइय्या सबके संकट हरैं। वह बोलीं कि आम दिनों में तो नहीं लेकिन पर्व पर जगह-जगह रोके जाने से घूमना पड़ता है। इस परेशानी के बीच में पुण्य कामना से स्नान हो जाए तो सौभाग्य समझिए।
कुंभ मेला की भव्यता का प्रचार दिल्ली से दो बहनों को प्रयागराज तक खींच लाया। संगम नोज पर पैदल चलकर हांफते हुए पहुंची ७० वर्षीय मंजू चौधरी ने मेला पुलिस की खुले दिल से प्रशंसा की, वह बोलीं, पुलिस वालों का व्यवहार परेशानी और थकान को भुलाने वाला रहा। यहां जगन्नाथधाम के शिविर में रुकीं मंजू ने बताया कि बुजुर्गों के लिए मेला प्रशासन अलग से व्यवस्था करता तो भव्यता और बढ़ जाती। उन्होंने कहा कि यहां आकर मन खुश हो गया।
कुंभ की भव्यता खींच लाई प्रयागराज
दिल्ली से ही आईं आशा माथुर (73) भी कुंभ आयोजन को अद्भुत बताया। उन्होंने कहा कि पुण्य कमाने आए हैं, लेकिन पैदल चलने से बीमारों जैसी हालत हो गई है। उन्होंने कहाकि हर तरफ भक्ति का महौल पर वाहन वालों पर प्रशासन का अंकुश नहीं है। ई रिक्शा वाले जरा सी दूर चलने के लिए बुकिंग कराने को कहते हैं और तीन सौ रुपये मांगते हैं। मोलभाव करने पर वह आगे बढ़ जाते हैं। उन्होंने भी कुंभ आयोजन की भव्यता को सराहते हुए कहा कि जहां रोकटोक हो, वहां बुजुर्गों के लिए वाहन की व्यवस्था होनी ही चाहिए।