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कुंभ 2019: आज धूमधाम से मनाई जाएगी मकर संक्रांति, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश

Tue, 15 Jan 2019 03:24 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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सूर्य देव के राशि परिवर्तन के साथ ही मंगलवार, 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। सूर्य 14 जनवरी की रात में 2.19 बजे मकर राशि में प्रवेश कर गए हैं। शास्त्रों के मुताबिक सूर्यास्त के बाद किसी भी समय मकर संक्रांति होने पर अगले दिन संक्रांति का पुण्य काल सूर्योदय से मध्याह्न काल तक रहेगा। ऐसे में मकर संक्रांति उदयातिथि में 15 जनवरी यानि कि आज मनाई जाएगी।

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मकर संक्रांति पर दो राशियों में दो ग्रहीय योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। वहीं, साध्य योग व कौलव करण होने से संगम में डुबकी लगाने मात्र से श्रद्धालुओं को अश्वमेध यज्ञ कराने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होगी।

मकर संक्रांति पर देश और दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं सहित सभी अखाड़े भी पहला शाही स्नान करेंगे। उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिर्विद पं.दिवाकर त्रिपाठी ‘पूर्वांचली’ के मुताबिक पहला शाही स्नान अश्विनी एवं भरणी नक्षत्र, साध्य योग तथा अमृत योग के साथ-साथ गुरु, मंगल के राशि परिवर्तन राजयोग में होगा। अबकी मकर संक्रांति पर भौमश्विनी सहित सर्वार्थसिद्धि योग में मकर संक्रांति स्नानपर्व का महात्म्य एवं पुण्य अनंत गुना होगा। संक्रांति के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। काल चक्र एस्ट्रो वास्तु सेंटर के निदेशक ज्योतिर्विद ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार इस अवसर पर तिल, गुड़, घी, चावल आदि का दान पुण्यदायी होगा।
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कुंभ मेला में अखाड़ों के स्नान का क्रम और समय देखने के लिए यहां करें क्लिक

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संक्रांति से ही आरंभ होगा कल्पवास

संगम की रेती पर परंपरा के मुताबिक श्रद्धालु माघ में पौष पूर्णिमा से लेकर माघी पूर्णिमा तक तकरीबन एक माह का कल्पवास करते हैं लेकिन, अबकी यह अवधि बढ़ गई है। मकर संक्रांति के पौष पूर्णिमा से पहले पड़ने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मकर संक्रांति से ही कल्पवास आरंभ कर देंगे। संक्राति से ही कल्पवास आरंभ करने के मद्देनजर लाखों श्रद्धालु संगम की रेती पर पहुंच चुके हैं। 

‘अमर उजाला’ से बातचीत में वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित डॉ.प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने कहा, शास्त्रीय विधान के अतिरिक्त कल्पवास लोकरीति और कुलरीति से भी होता है। ऐसे में संक्रांति की अवधारणा वाले श्रद्धालुओं का एक वर्ग मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक कल्पवास करेगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मकर संक्रांति से माघी पूर्णिमा तक कल्पवास करेंगे। वहीं बदलापुर, जौनपुर से आए विशाल पांडेय ने कहा, श्रद्धालुओं का एक वर्ग पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक का ही कल्पवास करेगा।

तीर्थपुरोहितों की दिक्कतें  बरकार, गाटा मार्ग पर पुआल
कल्पवासी मुख्यत: तीर्थपुरोहितों के ही यजमान होते हैं। ऐसे में तीर्थपुरोहित उनकी तैयारियों में जुटे हैं लेकिन उनके शिविरों में अब तक बेशुमार दिक्कतें हैं। वरिष्ठ तीर्थपुरोहित राजेेंद्र पालीवाल कहते हैं, मेले में यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए लिंक मार्ग, गाटा मार्ग पर चकर्ड  प्लेट बिछाई जाती थी, इस बार मेला क्षेत्र के विभिन्न सेक्टरों में चकर्ड प्लेट मार्ग न बनाकर पुआल मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। इतना ही नहीं कई गाटा मार्गों पर बिछाई गई चकर्ड प्लेटें उठाकर दूसरे स्थानों पर ले जाई गई हैं।

सेक्टर नंबर तेरह में दुर्गा शिविर तीर्थपुरोहित माधव शर्मा, रामानंद शर्मा, रवि शर्मा के कैंप के पास पुआल मार्ग बनाया जा रहा है। तीर्थ पुरोहित प्रकाशानंद शर्मा ने कहा, पुआल मार्ग तो चालीस वर्ष से भी ज्यादा पुरानी व्यवस्था है। आधुनिक व विकसित मेले में यह व्यवस्था देखकर हैरत होती है। इसी प्रकार सेक्टर 06 मे जगह-जगह से लगे गाटा रोड से चकर्ड प्लेट उठाकर अन्यत्र कहीं वीआईपी स्थान पर लगाई जा रही हैं। हरी मछली निशान के तीर्थपुरोहित पंडित राजेद्र पालीवाल ने आरोप लगाया कि प्रशासन को तमाम जानकारियां दिए जाने के बावजूद कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जो सीधे-सीधे तीर्थपुरोहितों ही नहीं कल्पवासियों की उपेक्षा है।
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