कुंभ क्षेत्र में एक शिविर ऐसा भी है, जहां पिछले करीब एक महीने से विचारों का मंथन चल रहा है। दिव्य प्रेम सेवा मिशन के इस शिविर में संघ के सर कार्यवाह भैयाजी जोशी, सह सर कार्यवाह कृष्ण गोपाल, आईसीसीआर के अध्यक्ष डा. किरन सहस्रबुद्धे जैसे अनेक बुद्धिजीवियों के साथ विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के शोध छात्रों ने अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक आर्थिक पहलुओं में अपने विचार रखे हैं।
दिव्य प्रेम सेवा मिशन स्थापना दिवस के मौके पर स्वामी विवेकानंद की स्मृति में हिंदुत्व स्वामी विवेकानंद की दृष्टि से जैसे विषय पर मंथन किया गया। विश्व में भारतीय दृष्टिकोण कितना प्रभावी रहा है, इस पर शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती और संघ के सह सर कार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने अपने विचार रखे। बताया कि दुनिया के दूसरे देशों में भारतीय मनीषी आज भी भारत को समृद्धशाली बनाने जुटे हैं। विवेकानंद आज की पीढ़ी के प्रेरणापुंज हैं, हमें उनका अनुसरण करना चाहिए।
इसी तरह कुंभ को राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन का पर्व बताते हुए सह कार्यवाह भैयाजी जोशी और मानव सेवा उत्थान समिति के संस्थापक और दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक आशीष गौतम ने बताया कि कुंभ में पांच करोड़ लोग एक ही दिन में एक जगह इकट्ठा होते हैं, यह अद्भुत संयोग सिर्फ भारतवर्ष में ही मिल सकता है। मजे की बात यह है कि यहां कोई भूखा नहीं रहता है।
इसके अलावा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर भी मंथन हुआ। जिसमें युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उसके समाधान पर विशिष्ट लोगों ने चर्चा की। इसी के साथ आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, स्वामी रामदेव जैसे संतों के अलावा संघ क्षेत्र प्र्रचारक अनिल, डा.आरपीएन सिंह, मनोज जोशी, कथा वाचक आचार्य शांतनु, संजय चतुर्वेदी, उमेश निगम सहित अनेक प्रमुख लोगों की तरफ से अभी तक लगातार विचारों का मंथन चल रहा है।