बेटा हो तो ऐसा, चार दिन पहले मां ने कुंभ देखने और संगम स्नान की इच्छा जताई और वह सहर्ष तैयार हो गया। मां को ठीक से दिखता भी नहीं, खुद भी शारीरिक रूप से कुछ कमजोर लेकिन हौसला बुलंद दिखा। साथ चलने के लिए चाची को तैयार किया और पहुंच गए प्रयागराज।
रेलवे स्टेशन पर दो घंटे इंतजार के बाद भी बस, ई रिक्शा नहीं मिला तो पैदल ही चल दिए कुंंभ क्षेत्र की ओर, धीरे-धीरे चलते-चलते पहुंचे मेला तो भीड़ में चाल धीमी होने से डगर मगर होते रहे। पुण्य की आस से मां-बेटे और चाची का हाथ कहीं नहीं छूटा।
गोंडा के गौरा चौकी की रहने वाली 77 वर्षीय गिरिजा देवी ने बताया कि अब मोक्ष की कामना है, सगरौ पाप धुई के बेटवा के गंगा मइया आशीर्वाद देइहंय.... बेटे बेचन गुप्ता ने बताया कि वह खेती किसानी करता है। पहली बार मां ने कोई इच्छा जाहिर की तो उसे पूरा करने चला आया। बेचन के मुताबिक मां को अकेले संभालना कठिन था इसलिए चाची 65 वर्षीय सावित्री देवी को भी लाए हैं। मौनी की डुबकी लगाकर सोमवार को वापस जाएंगे लेकिन इससे पहले मां को कहीं भागवत कथा जरूर सुनवाएंगे।
कुंंभ स्नान के लिए स्टेशनों तथा पार्किंग स्थलों से शटल बसों की व्यवस्था की गई है। कुल 500 बसें चलाई जा रही हैं। हालांकि, शटल बसें निर्धारित स्थान तक ही चलाई जा रही हैं। चंकि झूंसी, फाफामऊ, नैनी पुल पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसकी वजह से लोगों को 10 से 15 किमी पैदल चलना पड़ा। रविवार को पांच लाख से अधिक लोगों को शटल बसों से लाया गय। मंडलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि दिन में ११ बजे तक ही ढाई लाख लोगों को लाया जा चुका था।।
अक्षयवट, सरस्वती कूप का दर्शन छह से
संगम स्नान के लिए आने वाले मंगलवार तक अक्षयवट सरस्वती कूप का दर्शन नहीं कर पाएंगे। मौनी स्नान के लिए स्नानार्थियों की भारी भीड़ आ रही है। इसे देखते हुए पांच फरवरी तक दर्शन पर रोक लगा दी गई है। अब छह फरवरी से दर्शन हो पाएगा।
ई-रिक्शा भी प्रतिबंधित
कुंभ क्षेत्र में रविवार शाम से ई-रिक्शा की सुविधा प्रतिबंधित कर दी गई। सोमवार को भी ई-रिक्शा नहीं चलेंगे। मौनी अमावस्या पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मेला से बाहर झूंसी में कटका से आगे कोई ई-रिक्शा नहीं चलेगा।