कुंभ की सांस्कृतिक परंपरा समुद्र मंथन, झांकी के जरिए विश्व पटल पर प्रदर्शित होगी। पुराणों में देवासुर संग्राम से जुड़े समुद्र मंथन के प्रसंग पर आधारित यह झांकी गंगा पार अरैल में बसाए गए संस्कृति ग्राम में लगाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार की दोपहर अरैल में संस्कृति ग्राम के उद्घाटन के समय समुद्र मंथन की झांकी का अनावरण किया। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत के पान के लिए देवों और असुरों में संघर्ष हुआ था। उस दौरान विश्वमोहिनी रूप में भगवान विष्णु के हाथों अमृत कलश की बूंदें प्रयागराज समेत जिन चार स्थानों पर छलकी थीं, उन्हीं स्थानों पर स्नान का सबसे बड़ा कुंभ पर्व लगने की मान्यता रही है।
मुख्यमंत्री ने कला कुंभ के प्रवेश द्वार पर बने समुद्र मंथन के दृश्य पर आधारित सात फीट ऊंचे मूर्तिशिल्प को सराहा। उन्होंने कहा कि ऐसे मूर्तिशिल्प और बनाए जाने चाहिए। समुद्र मंथन की यह अनूठी झांकी वाराणसी की कला संस्था सरकार एंड कंपनी के मूर्तिकारों ने बनाई है। इसमें मंदराचल पर्वत की मथानी में शेषनाग को रस्सी के रूप में लपेट कर देवता और असुर समुद्र मंथन करते दिखेंगे। शेषनाग की पूंछ की ओर देवता और फन की ओर असुर बनाए गए हैं। बीच में मंदराचल पर्वत के ऊपर विश्व मोहिनी रूप में भगवान विष्णु को अमृत कलश लिए दिखाया गया है।
इस नयनाभिराम झांकी का मुख्यमंत्री ने अनावरण किया, ताकि कुंभ में आने वाले संत-भक्त और पर्यटक सनातनी संस्कृति की गहरी जड़ों से परिचित हो सकें। इस संस्कृति ग्राम में समुद्र मंथन की झांकी तो एक बानगी भर है। इसमें युग-युग की सनातनी संस्कृति के गौरव की झलक मिलेगी। झांकी में प्रागैतिहासिक काल के अलावा सिंधु घाटी की सभ्यता, रामायण, महाभारत युग से लेकर मध्यकालीन संस्कृति के भी रूप दिखेंगे। एलोरा, एलिफेंटा की गुफाएं, कैलाश मंदिर, मथुरा, सारनाथ की शिल्प कला के भी दर्शन इस संस्कृति ग्राम में होंगे। सीएम ने इस मौके पर राजकीय अभिलेखागार, संग्रहालय निदेशालय और राज्य ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित प्रदर्शनियों का भी अवलोकन किया।
अभिलेखागार ने इस बार 1870 के समय के अभिलेखों की प्रदर्शनी लगाई है। वहीं, राज्य ललित कला अकादमी ने कुंभ पर आधारित छायाचित्रों की प्रदर्शनी सजाई है। बाबा सत्यनारायण मौर्य की गंगा पर आधारित प्रदर्शनी को भी पसंद किया जा रहा है। अयोध्या शोध संस्थान की ओर से लगाई गई पुस्तक प्रदर्शनी में रामायण पर कई भाषाओं में हुए प्रकाशनों को प्रदर्शित किया गया है। कला कुंभ में मुखौटों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। प्रदर्शनियां चार मार्च तक चलेंगी।