कुंभ क्षेत्र में रोड पटरी से लेकर शिविरों में लगी दुकानों में इन अंधविश्वासों के सामान आपको आसानी से मिल जाएंगे। परेड मार्ग पर घोड़े की नाल की अंगूठी बेचने वाला रामरति लाउडस्पीकर लगाकर लोगों को अंगूठी के लिए लुभाता है। पूछने पर वह टेप रिकॉर्डर की आवाज सुनकर उसके साथ-साथ बोलते हुए इसके कारोबार में लाभ मिलेगा, नौकरी मिलने में आसानी होगी आदि तरह के कई फायदे गिना डालता है। रामरति को यह नहीं मालूम कि अंगूठी काले घोड़े की नाल की बनी है, पर लाभ पहुंचने की शत-प्रतिशत गारंटी उसके पास है। ऐसे ही संगम के पास दुकान लगाकर पत्थर और यंत्र बेचने वाले अयोध्या से सौरभ और इश्तियाक भी नाम पूछकर राशि के मुताबिक बताते हैं कि फलां नाम के पत्थर की अंगूठी धारण करने से लाभ मिलेगा
बाबा जी बेच रहे तो ठीक ही होगा
सेक्टर 8 स्थित एक आध्यात्मिक शिविर में जयपुर से आईं सुषमा राठौर परिवार संग स्फटिक की माला की खरीदारी करती मिलीं। माला की कीमत 1200 रुपये है। स्फटिक की माला असली इसलिए है क्योंकि यह बाबा जी के शिविर में बिक रही है और इससे दरिद्रता दूर होती है। ऐसा वह बताती हैं। ऐसे ही कई शिविरों के अलावा रोड पटरी पर मूंगा, पुखराज, गोमेद पत्थर के साथ-साथ लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए यंत्र और यहां तक बच्चों को नजर से बचाने के लिए ताबीज भी मिल जाएंगे।