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कुंभ 2019ः विहिप की धर्मसंसद प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट से मांग, अयोध्या मामले की प्रतिदिन हो सुनवाई

Sat, 02 Feb 2019 02:27 PM IST
kapil kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद में दूसरे दिन शुक्रवार को लाए गए प्रस्ताव में अयोध्या में राम मंदिर के संकल्प को दोहराया गया। सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या मामले की प्रतिदिन सुनवाई कर इस पर जल्द निर्णय देने की अपील की गई। साथ ही चेताया गया कि यदि किसी ने भी मंदिर निर्माण में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की तो वह राष्ट्रविरोधी माना जाएगा। इन राष्ट्रविरोधी शक्तियों से लड़ने के लिए हर स्तर पर लड़ा जाएगा, चाहे इसके लिए किसी भी सीमा तक जाकर कष्ट सहना क्यों न पड़े। इसके अलावा देश में कहीं भी बाबर के नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी। ।

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संघ प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में हुई धर्म संसद में मंदिर निर्माण के लिए तारीख की घोषणा की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन संतों ने किसी भी बड़े आंदोलन के लिए छह महीने की मोहलत मांगी। मंदिर विरोधी शक्तियों तथा राजनीतिक लाभ लेने के षड्यंत्र से बचाने के लिए आंदोलन के किसी नए चरण की घोषणा नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया गया। धर्म संसद में मंदिर निर्माण के लिए जगजागरण का भी प्रस्ताव पारित हुआ। जगजागरण के तहत ही शनिवार को सुबह 10 से 11 बजे के बीच संगम लोअर पर राम भक्तों से एकत्र होने का आह्वान किया गया।

इसी क्रम में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, छह अप्रैल को 13 करोड़ विजय मंत्र ‘श्रीराम जय राम, जय-जय राम’ का जाप होगा। संतों ने लोगों से मंदिर तथा अन्य स्थलों पर सामूहिक रूप से जाप करने की अपील की।धर्म संसद में सिर्फ राम मंदिर का प्रस्ताव रखा गया और चर्चा हुई। प्रस्ताव स्वामी अखिलेश्वरानंद ने रखा, जिसका पूर्व केंद्रीय मंत्री परमार्थ आश्रम के स्वामी चिन्मयानंद ने अनुमोदन किया। प्रस्ताव में राम मंदिर निर्माण में बाधा बनने वालों को राष्ट्र विरोधी बताया गया। राम मंदिर प्राथमिकता में नहीं होने की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर आपत्ति जताने के साथ अयोध्या मामले की प्रतिदिन सुनवाई कर दो से तीन माह में निर्णय देने की मांग की गई।

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मोहन भागवत ने गर्भगृह पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संतों ने राम मंदिर पर जल्द फैसला आए, इसके लिए केंद्र सरकार से भी जरूरी कदम उठाने की मांग की। विहिप नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या में गैरविवादित जमीन वापस दिए जाने की अर्जी दिए जाने का स्वागत किया। अयोध्या मामले की सुनवाई में देरी, राम सेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाने आदि बिंदुओं को लेकर संतों के निशाने पर कांग्रेस, वामपंथी संगठन समेत अन्य दल भी रहे।निर्वाणी अखाड़ा के सचिव गौरीदास ने कहा कि कुछ लोग हिंदू समाज को बांटने के लिए अयोध्या कूच की बात करते हैं।

यह राम मंदिर के लिए बलिदान देने वालों के साथ मजाक है। अखिलेश्वरानंद ने कहा कि कुछ दलों को लाभ पहुंचाने के लिए किया ऐसा जा रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी गर्भगृह पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर राम मंदिर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा दी है। उन्होंने प्रस्ताव के हर बिंदु का अनुमोदन किया। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद, निर्मोही अखाड़ा के सचिव रामजीदास आदि संतों ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। धर्म संसद में माधवाचार्य विश्वरतीर्थ, स्वामी कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार, केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे, विनायक राव, चंपत राय जीवेश्वर मिश्र समेत बड़ी संख्या में संत और विहिप कार्यकर्ता शामिल रहे।

प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु
1. मंदिर निर्माण में बाधा उत्पन्न करने वाले माने जाएंगे राष्ट्रद्रोही
2. देश में कहीं भी बाबर के नाम पर नहीं बनाने देंगे मस्जिद
3. फिलहाल छह माह तक कोई आंदोलन नहीं किया जाएगा
4. अखाड़ा परिषद तथा अन्य संतों के अयोध्या कूच की घोषणा की निंदा
5. चलेगा जागरण अभियान, आज संगम पर जमावड़ा
6. छह अप्रैल को होगा 13 करोड़ राम नाम का जाप
7. संघ प्रमुख ने प्रस्ताव के हर बिंदु का किया अनुमोदन
8. मोदी-योगी पर जताया भरोसा, अन्य दलों पर हमलावर रहे संत
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