मेले से अखाड़ों की विदाई होने के बाद कल्पवासियों के चला-चली की बेला शुरू हो गई है। इसके चलते मेला की चहल-पहल बेरंग होने लगी है। पूरा मेला क्षेत्र वीरान हो चला है। कल्पवासी अपने माह भर की तपस्या बिताने के बाद घरों की ओर से तेजी से लौटने लगे हैं। हालांकि कुछ शिविर महाशिवरात्रि के स्नान के लिए रूके भी हैं।
माघी पूर्णिमा स्नान के दिन बाद कल्पवास समाप्त हो गया। इस दिन स्नान ध्यान करने के बाद कल्पवासी की शिविरों में दिन भर में पूजा अर्चन कार्यक्रम चला। इसके बाद मेला क्षेत्र के सेक्टर 13 में बसे कल्पवासी शिविरों में घर लौटने का उत्साह लोगो में दिखा। परिवार के सदस्य माघी पूर्णिमा के बाद अपने जैसे खाने-पीने और पहनने ओढ़ने के सामान गाड़ियों से ढोने में लगे हैं।
बुधवार को कल्पवासियों के अधिकतर शिविर उजड़े-उजड़े रहे। हालांकि अभी भी कुछ कल्पवासी शिविर ऐसे हैं जहां लोग रह रहे हैं। वे जो महाशिवरात्रि के दिन स्नान ध्यान कर संगम क्षेत्र से विदा लेेंगे। सेक्टर 13 में नारायण सेवा संस्थान शिविर के सदस्य रुके हैं। वह महाशिवरात्रि पर गंगा स्नान के बाद वापस होंगे। शिविर के सदस्य चैतु ने बताया कि माह भर का पुण्य प्रताप तो मिला ही साथ गंगा मैया की गोदी में रहकर अनुपम आनंद का स्वाद चखा।