दिन में धूप और रात में ठिठुरन के बीच सड़कों पर कोसों पग-पग चलकर आस्थावान लोगों में कुंभ क्षेत्र पहुंच रहे लाखों लोगों में कई ऐसे भी हैं, जिनके लिए माता-पिता को तीर्थ स्नान कराने का पुण्य मिलेगा। इस भीड़ में एक मां के बेटा संग दामाद कलयुग का श्रवण कुमार बन लोगों के आस्था का केंद्र बने रहे। शनिवार को 93 वर्षीय मां को बल्ली और चादर से बनाई पालकी पर संगम नोज तक लाए, संगम स्नान कराया। भाव विह्वल मां टूटती आवाज में बोलीं, 'दामाद बना बेटवा, पूत दूध के कर्ज अदा करि दिहिस।'
मध्य प्रदेश में रीवा के उलही मरिगवां गांव निवासी सुरेश शर्मा अपनी बुजुर्ग मां को कुंभ मेले में लाने का साहस जुटाया। 93 वर्षीय राजकुमारी शर्मा की संगम स्नान की इच्छा पूरी करने का संकल्प लिया। गांव से बस पर सवार होकर कौंधियारा के कैथा गांव में ब्याही अपनी बहन के घर पहुंचे। रात में गलन से मां को बचाने के लिए तपता जलाया फिर उन्हें रजाई में लपेट कर सुलाया। कैथा से शनिवार सुबह संगम स्नान के लिए बहनोई पं. लालता प्रसाद पांडेय से बतकही शुरू की तो दोनों ने मिलकर रास्ता निकाल लिया।
एक बल्ली और चादर की झल्ली से बनी पालकी तैयार की। दामाद भी मां रूपी सास की सेवा को सहर्ष तैयार हुए। बल्ली एक कोने पर बेटा सुरेश और दूसरे पर दामाद लालता, दोनों राजकुमार को संगम तट तक पैदल ले आए। संगम नोज पर मां के प्रति पुत्र और दामाद की श्रद्धा देख श्रद्धालु भी नतमस्तक थे।
कोई बुजुर्ग मां के चरण स्पर्श कर आशीष ले रहा था तो यह देखने वाले लोगों ने दोनों की इस भावना को सराहा। संगम स्नान कर आह्लादित मां बेटे और दामाद का आशीर्वाद देती नहीं थक रही थीं। वह टूटी फूटी आवाज में सिर्फ इतना ही बोलीं, कुंभ में डुबकी लगावयै कै इच्छा रही, जउउन बेटवन पूरी कर देहेन, अब एहर पाछु आए पउबय कि नाहिं...जय गंगा मइय्या...।