फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्षमावाणी पर्व : क्षमा शब्द मानवीय जीवन की आधारशिला, जिसके जीवन में क्षमा है, वही महान

Wed, 18 Sep 2024 01:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कहा गया कि क्षमा धर्म विश्व शांति का प्रबल मंत्र है। क्रोध न करना ही क्षमा का दूसरा नाम है। क्षमा मांगने की नहीं स्वयं के अंदर उतारने की आवश्यकता है। जैसे रूप का आभूषण गुण है और गुण का आभूषण ज्ञान है। उसी तरह ज्ञान का आभूषण क्षमा है। क्षमा से विश्वव्यापी समस्याओं का समाधान हो सकता है। 
विज्ञापन
जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में क्षमावाणी पर्व मनाया गया। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शहर के जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में क्षमा वाणी पर्व बुधवार को विधि विधान से मनाया गया। इस मौके पर अनुयाइयों ने विशेष पूजन, अनुष्ठान, शांति धारा अनुष्ठान आदि का आयोजन किया। सबसे पहले भगवान महावीर का पूजन अभिषेक और आरती की गई। उसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने एक दूसरे से क्षमा याचना कर अपने द्वारा की गईं गलतियों के लिए क्षमा मांगी।

विज्ञापन











कहा गया कि क्षमा धर्म विश्व शांति का प्रबल मंत्र है। क्रोध न करना ही क्षमा का दूसरा नाम है। क्षमा मांगने की नहीं स्वयं के अंदर उतारने की आवश्यकता है। जैसे रूप का आभूषण गुण है और गुण का आभूषण ज्ञान है। उसी तरह ज्ञान का आभूषण क्षमा है। क्षमा से विश्वव्यापी समस्याओं का समाधान हो सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जैन धर्मावलंबियों ने सालभर में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना की। जैन मुनियों ने बताया कि  क्षमा शब्द मानवीय जीवन की आधारशिला है। जिसके जीवन में क्षमा है, वही महानता को प्राप्त कर सकता है। क्षमावाणी हमें झुकने की प्रेरणा देती है। दशलक्षण पर्व हमें यही सिख देता है कि क्षमावाणी के दिन हमें अपने जीवन से सभी तरह के बैर को मिटाकर प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा मांगनी चाहिए। दूसरों को भी क्षमा करने का भाव है ही क्षमावाणी है।  

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें