Kriya Yoga is a great medium to destroy negative forces
क्रियायोग नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करने का बड़ा माध्यम
प्रयागराज। ताश खेलने या टीवी सीरियल-फिल्में देखने और चाय-पान की दुकानों पर घंटों गप्पे लड़ाकर घंटों समय नष्ट करने से कुछ हासिल नहीं होता। इसके बजाए मनुष्य को क्रियायोग का अभ्यास, ध्यान करके अपने जीवन के लक्ष्य को पूरा करना चाहिए। इससे अज्ञान से ज्ञान की यात्रा पूरा करके जीव व परम ब्रह्म के बीच दूरी मिटाई जा सकती है। वैज्ञानिकों ने प्रयोगों से सिद्ध कर दिया है कि क्रियायोग ध्यान से मनुष्य अल्प काल में अज्ञान से ज्ञान की यात्रा पूरी कर वह अनुभव कर अपने अस्तित्व को जानने में सफल हो सकता है।योगाचार्य योगी सत्यम ने रविवार को गंगा किनारे मोरी मार्ग स्थित क्रियायोग शिविर में देश-विदेश से आए कल्पवासियों के बीच कही।
दोपहर बाद ‘क्रियायोग विज्ञान का आधुनिक जीवन में महत्व एवं इकी साधना से मनुष्य का सर्वांगीण विकास’ विषयक परिचर्चा में योगी सत्यम ने कहा कि क्रियायोग को अपनाकर सफलता प्राप्त की जा सकती है। राष्ट्र निर्माण के अभियान में क्रियायोग की भूमिका पर उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला। बताया कि मनुष्य के सिर व रीढ़ में सत्य एवं अहिंसा की शक्तियां हमेशा प्रवाहमान रहती हैं। क्रियायोग ध्यान से इन शक्तियों को जागृत करते हैं। इससे मनुष्य में विद्यमान देवत्व का विकास होता है और राक्षसी प्रवृत्ति बदलने लगती है। इस अवस्था में मनुष्य के अंदर सभी प्रकार के सद्गुण जागृत हो जाते हैं और वह समाज में एकता, शांति के साथ ही प्रगति के पथ पर अग्रसर होने लगता है। यही वजह है कि मौजूदा समय क्रियायोग का विश्वव्यापी प्रचार- प्रसार वैज्ञानिक तरीके से बढ़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में क्रियायोग दुनिया भर में फैल सकता है। संचालन ज्ञानमाता राधा सत्यम ने किया।